UP राजकीय निर्माण निगम का जूनियर इंजीनियर और ड्राइवर 1 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
Meerut News: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार दोपहर मेरठ में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। टीम ने उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड के जूनियर इंजीनियर (अवर अभियंता) और उनके प्राइवेट ड्राइवर को जागृति विहार स्थित कार्यालय के मुख्य गेट पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। यह घूस एक कॉलेज के निर्माण कार्य का बकाया भुगतान रिलीज करने के एवज में ली जा रही थी। एंटी करप्शन टीम ने आरोपियों के पास से केमिकल लगे नोट भी बरामद कर लिए हैं।
कॉलेज निर्माण के 25 लाख के भुगतान के लिए मांगी थी घूस
गंगानगर निवासी चौधरी सत्येन्द्र सिंह तोमर चौधरी एसोसिएट फर्म के संचालक हैं और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) में महासचिव भी हैं। उनकी फर्म को वर्ष 2020 में बागपत स्थित राजा मिहिर भोज डिग्री कॉलेज, बेगमाबाद पाबला के निर्माण का ठेका मिला था, जिसकी कुल लागत करीब 8.50 करोड़ रुपये थी। सत्येन्द्र सिंह तोमर के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2023 में ही मानकों के अनुरूप अपना काम पूरा कर दिया था। इसके बावजूद, विभाग में उनकी मूल राशि, सिक्योरिटी मनी, बिल और जीएसटी समेत कुल 25 लाख रुपये का भुगतान अटका कर रखा गया था।
बजट खत्म होने का बहाना बनाकर लटका रहे थे फाइल
आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भी विभाग द्वारा कभी बजट समाप्त होने तो कभी बिल प्रक्रिया लंबित होने का हवाला देकर फाइल को जानबूझकर लटकाया जा रहा था। इस भारी-भरकम भुगतान को पास करने के नाम पर उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड के अवर अभियंता (JE) योगेंद्र कुमार ने पौने दो लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। हालांकि, बाद में बातचीत के दौरान यह सौदा एक लाख रुपये में तय हुआ।
कार्यालय गेट पर एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल
परेशान होकर ठेकेदार सत्येन्द्र सिंह ने करीब दस दिन पहले एंटी करप्शन विभाग में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की पुष्टि होने के बाद टीम ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत जाल बिछाया। मंगलवार को टीम ने सत्येन्द्र सिंह को केमिकल लगे हुए नोट देकर अवर अभियंता योगेंद्र सिंह के कार्यालय भेजा। बातचीत के दौरान जब योगेंद्र सिंह ने साफ कह दिया कि बिना पैसों के बिल पास नहीं होंगे, तो सत्येन्द्र सिंह ने रकम कार में होने की बात कही।
इसे भी पढ़ें: अखिलेश यादव बोले- यूपी में सपा की सरकार बनते ही गिर जाएगी दिल्ली की सत्ता
निजी चालक के साथ कार से रकम लेते ही दबोचे गए
जैसे ही घूस की रकम लेने के लिए अवर अभियंता योगेंद्र सिंह अपने निजी चालक नीरज पाल के साथ कार्यालय के गेट पर खड़ी कार के पास पहुंचे, वैसे ही सत्येन्द्र सिंह ने उन्हें पैसे थमा दिए। नोट हाथ में आते ही पहले से घात लगाकर बैठी एंटी करप्शन टीम ने दोनों आरोपियों को रंगे हाथ दबोच लिया। टीम ने दोनों के पास से रिश्वत के एक लाख रुपये बरामद कर लिए हैं।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ मेरठ के मेडिकल थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, विभाग में इस भ्रष्टाचार की गहराई तक जाने के लिए केस से जुड़ी सभी फाइलों को तत्काल प्रभाव से सुरक्षित और सील करने के आदेश दे दिए गए हैं।
इसे भी पढ़ें: इन कॉकरोचों को उड़ने दीजिए, असमर्थन का शिकार होकर खुद बेमौत मरेंगे
