बाल साहित्य का क्षितिज केवल कविता-कहानी तक सीमित नहीं: डॉ. विकास दवे

bal sahitya goshthi

टीकमगढ़: आज के बदलते दौर में जहाँ साहित्य के अन्य विमर्शों पर खूब चर्चा हो रही है, वहीं बाल साहित्य के क्षेत्र में एक नए और गंभीर दृष्टिकोण की बेहद जरूरत है। आमतौर पर बच्चों के साहित्य को केवल पाठ्यपुस्तकों की कहानियों और कविताओं तक सीमित मान लिया जाता है, लेकिन बालमन की जिज्ञासाएं इससे कहीं आगे हैं। बच्चों की कल्पनाशीलता को शांत करने के साथ-साथ उन्हें देश के गौरवशाली इतिहास, पौराणिक आख्यानों, राष्ट्रधर्म और वीरता की कहानियों से जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।

बाल साहित्य ऐसा होना चाहिए जो मनोरंजन के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, रिश्तों की अहमियत और पर्यावरण चेतना को जगाकर बच्चों का सर्वांगीण चरित्र निर्माण कर सके। इसी उद्देश्य को लेकर प्रसिद्ध साहित्यकार व अभिनेत्री गीतिका वेदिका ने एक अनूठी पहल की है।

लड्डू गोपाल की अध्यक्षता में सजी अम्मा की बगिया बाल गोष्ठी

टीकमगढ़ में समर्पयामि फ़ाउण्डेशन के बैनर तले मई के पहले हफ्ते में एक बेहद अनूठे बाल साहित्य गोष्ठी व विमर्श का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इसकी अध्यक्षता स्वयं साक्षात बालगोपाल (लड्डू गोपाल) ने की और इसे अम्मा की बगिया नाम दिया गया। इस भव्य और सांस्कृतिक आयोजन में मध्य प्रदेश शासन के साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

यह गोष्ठी गीतिका वेदिका की माताजी उमा देवी पाराशर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में एक रचनात्मक कार्यशाला के रूप में आयोजित की गई थी, जो खुद अपने युवा दिनों में सरस्वती शिशु मंदिर में बच्चों को संगीत और बालगीत सिखाया करती थीं। उन्हीं की प्रेरणा से गीतिका ने साहित्य के क्षेत्र में यह कदम बढ़ाया है।

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स्थानीय साहित्यकारों का जमावड़ा और भव्य स्वागत

इस गरिमामयी आयोजन में टीकमगढ़ के तमाम प्रतिष्ठित रचनाकारों ने हिस्सा लिया, जिनमें आरपी तिवारी, गुलाब सिंह भाऊ, राजीव नामदेव राना, प्रमोद गुप्ता मृदुल, मुन्नालाल मिश्रा, सत्यनारायण तिवारी, एस आर सरल, स्वप्निल तिवारी, रविंद्र यादव, विशाल कड़ा, अनवर साहिल, एमएस श्रीवास्तव, लीना कुलथिया, रश्मि गोयल, मीनू गुप्ता, प्रीति सिंह परमार, अजीत श्रीवास्तव, पूरनचन्द्र गुप्ता, कौशल किशोर भट्ट, पं महेंद्र दिवेदी, शीलचन्द्र जैन, विजय मेहता, राम गोपाल रैकवार और मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी के जिला समन्वयक चांद मोहम्मद आखिर शामिल रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। मुख्य अतिथि डॉ. दवे का स्वागत तिलक लगाकर, शॉल-श्रीफल और संस्था का प्रतीक चिन्ह ज्योतिदीप भेंट कर किया गया। इस दौरान अतिथि पुस्तकार्पण सत्र में लेखकों ने अपनी कृतियां भी उन्हें भेंट कीं।

बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. विकास दवे ने गीतिका वेदिका द्वारा लड्डू गोपाल को अध्यक्ष बनाने के नवाचार की खूब तारीफ की। उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे वे सरस्वती शिशु मंदिर में आचार्य से प्रधानाचार्य बने और बाद में विद्याभारती की प्रसिद्ध बाल पत्रिका ‘देवपुत्र’ के संपादक रहे। उन्होंने साझा किया कि जब बाल पत्रिकाओं का दौर कम हो रहा था, तब ‘देवपुत्र’ ने 3 लाख 71 हजार प्रतियों के प्रसार के साथ विश्व रिकॉर्ड बनाया था।

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पराग और नंदन जैसी मशहूर पत्रिकाओं के बंद होने पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में गीतिका जैसे प्रयास बहुत जरूरी हैं। उन्होंने बच्चों को साबू या चाचा चौधरी जैसे काल्पनिक पात्रों के बजाय छत्रपति शिवाजी, वीर सावरकर और महाराणा प्रताप जैसे वास्तविक महानायकों को आदर्श मानने की सीख दी।

पर्यावरण-मित्रता और बालसभा का संकल्प

यह आयोजन पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल रहा। मेहमानों को घर में बने पारंपरिक पकवान (गोरस सामग्री) दोने-पत्तल में परोसे गए और प्लास्टिक या थर्माकोल का पूरी तरह बहिष्कार किया गया, जिसने ‘अम्मा की बगिया’ के नाम को सच में सार्थक कर दिया। कार्यक्रम के अंत में भावुक होते हुए संचालिका गीतिका वेदिका ने डॉ. दवे और सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने घोषणा की कि अब से इस संस्था द्वारा ‘अम्मा की बगिया’ के तहत बच्चों के लिए नियमित रूप से ‘बालसभा’ का आयोजन किया जाएगा। टीकमगढ़ जैसे छोटे शहर में ‘समर्पयामि’ जैसी संस्था की यह कोशिश वाकई बाल साहित्य के क्षेत्र में एक मील का पत्थर है।

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