पाकिस्तान अब नहीं बचा पाएगा अपना कोई भी आतंकी

पुलवामा आतंकी हमले का साजिशकर्ता और भारत में कई आतंकी हमलों में वाछित अल बदर मुजाहिदीन का आपरेशनल कमांडर अर्जमंद गुलजार उर्फ़ हमजा बुरहान पाकिस्तान में गुलाम कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद में मार दिया गया है। हमजा को दो अज्ञात लोगों ने आजरा में एमएस कालेज परिसर के पास मारा। मूलतः दक्षिण कश्मीर में पुलवामा के खरबतपोरा के रहने वाले बुरहान पर सुरक्षाबलों ने 10 लाख का इनाम रखा था। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी उसे 20 अप्रैल, 2022 को आतंकी घोषित कर रखा था।
हमजा बुरहान करीब आठ वर्ष से पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई का बहुत चहेता बन गया था। आईएसआई व पाक सेना हमजा की सुरक्षा किया करती थी। वह आतंकी संगठन अल बदर मुजाहिदीन की कमान काउंसिल में तीसरा स्थान पर था। पहले नंबर पर बख्त जमीन उसके बाद यूसुफ बलोच और हमजा बुरहान आता था। घाटी में हिजबुल मुजाहिदीन के नेटवर्क के लगभग तबाह होने के बाद आईएसआई के स्थानीय चेहरे के रूप में उसे इस्तेमाल करते हुए कश्मीर में स्थानीय आतंकियों की भर्ती का षड्यंत्र चला रही थी।
पाकिस्तान में जिस प्रकार एक के बाद एक आतंकी मारे जा रहे हैं उससे यह बात सिद्ध हो रही है कि जो पाकिस्तान आज पश्चिम एशिया युद्ध में शांति दूत बनने की कोशिश कर रहा है, असल में दुनिया भर में अशांति का दूत है। पाकिस्तान केवल अपने आपको बचाने के लिए अमेरिका की गोद में बैठकर दुनिया को शांति मार्ग दिखाने का नाटक कर रहा है।
पुलवामा हमले में 14 फरवरी, 2019 को जम्मू कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पुलवामा में आतंकियों ने विस्फोटकों से भरी एक कार से सीआरपीएफ के काफिले में शामिल वाहन को टक्कर मारी थी। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। यह कुख्यात आतंकी हमजा बुरहान उसी हमले का साजिशकर्ता था जो अब मारा जा चुका है। यह कई और आतंकी वारदातों मे भी शामिल रहा था। पाकिस्तान में जिस प्रकार से एक के बाद एक भारत विरोधी आतंकी मारे जा रहे हैं, उससे इन आतकी संगठनों के नेतृत्व में खलबली व बैचेनी बढ़ गई है कि अब अगला नंबर किसका हो सकता है। आतंकी संगठनों में खलबली मचना इसलिए भी स्वाभाविक है क्योंकि उनकी सुरक्षा पाक सेना करती है।
पाकिस्तान में एक चर्चा यह भी हो रही है कि कहीं ये घटनाएं आपसी गुटबाजी या संघर्ष का परिणाम तो नहीं हैं। हमजा बुरहान 2017 में पाकिस्तान चला गया था। वह खुद को पाकिस्तान में शिक्षक बताता था। वह पाक अधिकृत गुलाम कश्मीर में कई आतंकी संगठनों को प्रशिक्षण देने के काम में लगा हुआ था। साथ ही वह आतंकियों को भारत में घुसपैठ करवाने में मदद करता था। हमजा को अपने सर्किल में डाक्टर नाम से भी जाना जाता था।
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पाकिस्तान में एक के बाद एक आतंकी लगातार मारे जा रहे हैं। सुरक्षा की दृष्टि से यह एक बहुत बड़ा बदलाव है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान में अब तक दो दर्जन से अधिक ऐसे आतंकी मारे जा चुके हैं, जो भारत में किसी बड़ी आतंकी घटना में शामिल रहे हैं। अब तक जिन आतंकियों को एक तरह से मारा गया है उनमें मार्च 2025 को लश्कर आतंकी फैजल नदीम उर्फ अबु कताल, फरवरी 2025 को लश्कर -ए -तैयबा की राजनीतिक शाखा का चीफ मौलना काशिफ अली, मार्च 2025 में ही आईएसआई का अंडर कवर एजेंट मुफ्ती शाह मीर, नवंबर 2023 में आतंकी मससूद अजहर का करीबी रहीम उल्लह मारिक, नवंबर 2023 में ही लश्कर आतंकी अकरम गाजी और लश्कर आतंकी ख्साजा शाहिद फिर सितंबर 2023 में लश्कर आतंकी मौलना जियाउर रहमान, अप्रैल 2025 में मसूद अजहर का करीबी काजी एजाज आबिद, अक्तूबर 2023 में मसूद अजहर का करीबी दाऊद मालिक, दिसंबर 2023 में लश्कर आतंकी अदनान अहमद, फरवरी 2023 में हिजबुल आतंकी बशीर अहमद पीर मार्च 2022 में जैश का आतंकी जहूर इब्राहीम, मार्च 2025 में आईएसपीआर अधिकारी मेजर दानियाल, सितम्बर 2023 में लश्कर- ए -तैयबा का आतंकी रियाज अहमद तथा मई 2023 में खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिहं पंजवार को अब तक मारा जा चुका है। यह सभी कुख्यात आतंकी रह चुक थे तथा भारत में बड़़ी आतंकी वारदातों को आंजाम देने में इन सभी की बड़ी भूमिका रह चुकी थी।
इसके अलावा भी कई और आतंकवादी अज्ञात व गुमानाम लोगों के द्वारा मारे जा चुके हैं। पाकिस्तान में अभी भी हाफिज सईद और मसूद अजहर सहित भारत के मोस्ट वांटेड आतंकवादी खुलेआम घूम रहे हैं। दाऊद इब्राहीम भी सेना व आईएसआई के संरक्षण में वहीं रह रहा है और इन सभी की सुरक्षा अत्यंत कड़ी है। यहां पर यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि हमजा बुरहान को सेना ने सुरक्षा गार्ड और कार तक दे रखी थी। भारत के रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कई अवसरों पर पाक को कड़ी चेतावनी दे चुके हैं कि अब पाकिस्तान की एक भी गली व कोना भारत से छिपा हुआ नहीं रह गया है, जिस देश को भारत ने जन्म दिया है वह उसे समाप्त भी कर सकता है। भारतीय सेना भी कह रही कि अगर पाकिस्तान नहीं सुधरा तो उसका इतिहास- भूगोल सब कुछ बदल जाएगा।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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