शालीमार पैराडाइज सोसाइटी में विवाद, चोरी के बाद मेंटेनेंस बजट पर उठे सवाल

Shalimar Paradise Society

Lucknow News: शालीमार पैराडाइज सोसाइटी इन दिनों सिर्फ बढ़ती चोरी की घटनाओं को लेकर ही नहीं, बल्कि मेंटेनेंस और फंड के खर्च को लेकर भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। हाल ही में सोसाइटी के खाली पड़े कई विला में चोरी की वारदातों के बाद रेजिडेंट्स का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद न तो सुरक्षा व्यवस्था मजबूत दिख रही है और न ही बुनियादी सुविधाओं की सही मॉनिटरिंग हो रही है।

1 लाख का काम 2 लाख में के आरोपों ने बढ़ाई मुश्किल

सोसाइटी के कई निवासियों के बीच यह चर्चा गर्म है कि पहले जिस गार्डनिंग और मेंटेनेंस व्यवस्था पर करीब 1 लाख रुपये खर्च होते थे, अब उसी काम के लिए लगभग दोगुना खर्च दिखाया जा रहा है। रेजिडेंट्स का आरोप है कि कुछ पसंदीदा एजेंसियों और नर्सरी को फायदा पहुंचाने के लिए खर्च बढ़ाया गया है। कई लोगों का दावा है कि गार्डनिंग का काम पूरी सोसाइटी में समान रूप से नहीं हो रहा और यह सिर्फ चुनिंदा विला तक सीमित दिखाई देता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल

चोरी की घटनाओं के बाद सीसीटीवी और सिक्योरिटी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ निवासियों का कहना है कि कैमरों और सुरक्षा पर हाल ही में लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था कमजोर बनी हुई है। खाली पड़े कई विला के ताले टूटे होने और निगरानी की कमी को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है।

मच्छरों से लेकर गंदगी तक, हर तरफ असंतोष

सोसाइटी के अंदर लंबे समय से जमा पानी और पुराने पूल की सफाई को लेकर भी नाराजगी सामने आई है। रेजिडेंट्स का कहना है कि कई जगहों पर पानी जमा होने से मच्छरों का खतरा बढ़ रहा है, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं दिख रहा। कुछ लोगों ने तंज कसते हुए कहा, शायद मच्छरों और मैनेजमेंट के बीच कोई समझौता हो गया है।

अब उठ रही स्वतंत्र ऑडिट की मांग

सोसाइटी में अब यह मांग तेज हो रही है कि पूरे मेंटेनेंस और सुरक्षा खर्च का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। रेजिडेंट्स चाहते हैं कि सभी कॉन्ट्रैक्ट सार्वजनिक किए जाएं, लोवेस्ट बिडर प्रक्रिया अपनाई जाए, खर्च का सीए ऑडिट कराया जाए और सुरक्षा एवं मेंटेनेंस की वास्तविक रिपोर्ट निवासियों को दी जाए।

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मेंटेनेंस या कमीशन मॉडल

कुछ रेजिडेंट्स का आरोप है कि हर नए खर्च के पीछे कमीशन मॉडल काम कर रहा है। सोसाइटी के अंदर यह चर्चा तेज है कि लगातार बढ़ते चार्जेज के बावजूद सुविधाओं में वैसा सुधार नहीं दिख रहा, जैसा दावा किया जा रहा है।

सवाल सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि भरोसे का है

शालीमार पैराडाइज सोसाइटी का यह मामला अब सिर्फ चोरी या मेंटेनेंस विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पारदर्शिता, जवाबदेही और रेजिडेंट्स के भरोसे से जुड़ चुका है। अगर जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं हुई, तो यह मामला कानूनी और प्रशासनिक स्तर तक पहुंच सकता है।

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