गैस संकट से जूझ रहा भारत, सरकार ने बढ़ाया उत्पादन, अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया से भी मंगवा रहा गैस
lpg crisis india: देश के कई शहरों से एलपीजी गैस की किल्लत की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। कहीं सिलेंडर के लिए लंबी कतारें देखी जा रही हैं तो कहीं रेस्तरां बंद करने की नौबत आ गई है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग में हो रही दिक्कतें और सप्लाई में देरी की शिकायतें आम हो गई हैं।
सरकार का कहना है कि इस संकट से निपटने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अमेरिका और नॉर्वे जैसे देशों से भी गैस की सप्लाई ली जा रही है, जबकि अब तक भारत खाड़ी के देशों पर ही निर्भर रहा है।
98 फीसदी परिवारों तक पहुंच, लेकिन उत्पादन नहीं बढ़ा
देश में करीब 98 फीसदी परिवारों तक एलपीजी की पहुंच है। औद्योगिक विकास तेज होने से मैन्युफैक्चरिंग समेत तमाम कारोबारों में भी गैस की जरूरत बढ़ी है। लेकिन घरेलू उत्पादन में इजाफा नहीं हो पाया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत अपनी एलपीजी खपत का 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है।
ईरान-इजरायल जंग से बढ़ा संकट
सबसे बड़ी समस्या यह है कि भारत के कुल आयात का 90 फीसदी हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर आता है, जो ईरान में चल रही जंग के चलते प्रभावित है। भारत एलपीजी का आयात मुख्य रूप से सऊदी अरब, कतर, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, नाइजीरिया, ओमान और अंगोला से करता है। इनमें से ज्यादातर देशों की सप्लाई भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ही होकर गुजरती है। इसके अलावा कतर, सऊदी अरब और यूएई में ईरान के हमलों से वहां उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है, जिससे स्थिति और विकट हो गई है।
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संकट से निपटने के लिए सरकार ने सभी रिफाइनरियों को एलपीजी के उत्पादन में 25 फीसदी इजाफा करने का आदेश दिया है। बीते कुछ सालों में अमेरिका तेजी से भारत का गैस पार्टनर बना है। हालांकि वहां से आयात तत्काल बढ़ाना संभव नहीं है और उसका रूट भी वही है।
राहत की उम्मीद ऑस्ट्रेलिया से भी है, जिस पर सरकार कोशिश कर रही है। ऑस्ट्रेलिया से आने वाली सप्लाई चेन्नै के पास एन्नोर और ओडिशा के धमरा बंदरगाह पर आती है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर नहीं गुजरती। इससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
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