होली पर चंद्र ग्रहण का साया, 20 साल बाद बन रहा है ब्लड मून का दुर्लभ संयोग, जानें क्यों 4 मार्च को खेली जाएगी होली
Newschuski Digital Desk: साल 2026 की होली कुछ खास और थोड़ी अलग होने वाली है। 3 मार्च को लगने वाले साल के पहले चंद्र ग्रहण ने त्योहार के उत्साह और ज्योतिषीय गणनाओं में हलचल मचा दी है। खास बात यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, जिसके कारण इसका ‘सूतक काल’ भी मान्य होगा। इसी वजह से इस बार रंगों वाली होली 3 मार्च के बजाय 4 मार्च को खेली जाएगी।
20 साल बाद लाल चांद का दीदार
ज्योतिष गणना के अनुसार, करीब 20 साल बाद ऐसा मौका आ रहा है जब होली के ठीक बाद आसमान में चंद्रमा सुर्ख लाल (Blood Moon) नजर आएगा। इससे पहले साल 2006 में 14 मार्च को होली के दिन चंद्र ग्रहण लगा था। वैज्ञानिकों के लिए जहाँ यह एक अद्भुत खगोलीय घटना है, वहीं धार्मिक दृष्टि से इसे काफी संवेदनशील माना जा रहा है।
क्यों बदली होली की तारीख
हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण और उसके सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या उत्सव नहीं मनाया जाता।
होलिका दहन: 2 मार्च को होगा।
चंद्र ग्रहण और सूतक: 3 मार्च को सुबह से ही सूतक लग जाएगा, जो शाम को ग्रहण खत्म होने तक रहेगा।
रंगों वाली होली: सूतक और ग्रहण के प्रभाव के कारण अब रंग-गुलाल 4 मार्च को उड़ाया जाएगा।
ग्रहण का समय और सूतक (Chandra Grahan 2026 Timing)
ग्रहण शुरू: 3 मार्च 2026, दोपहर 03:20 बजे से।
ग्रहण समाप्त: 3 मार्च 2026, शाम 06:47 बजे तक।
भारत में प्रभाव: भारत के विभिन्न हिस्सों में यह लगभग 25 मिनट तक स्पष्ट दिखाई देगा।
सूतक काल: ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले यानी 3 मार्च की सुबह से ही सूतक शुरू हो जाएगा।
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क्या करें और क्या न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में कुछ सावधानियां जरूरी हैं।
गर्भवती महिलाएं: घर से बाहर न निकलें और सुई, चाकू जैसी नुकीली चीजों का प्रयोग न करें।
पूजा-पाठ: सूतक के दौरान मंदिरों के पट बंद रहते हैं, इसलिए घर में भी मूर्ति स्पर्श न करें।
मानसिक शांति: चंद्रमा मन का कारक है, इसलिए इस दौरान विवाद और क्रोध से बचें।
कहाँ-कहाँ दिखेगा यह नजारा
यह चंद्र ग्रहण दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, बेंगलुरु, चेन्नई के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी राज्यों (असम, अरुणाचल, नगालैंड) में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
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