यूपी ने बनाया फर्जी आंकड़ों का रिकॉर्ड, 26 हजार से अधिक गांवों में हर घर जल पहुंचाने का दावा
Jal Jeevan Mission: सच और सरकारी आंकड़ों में हमेशा छत्तीस का आंकड़ा रहा है। भ्रष्ट अधिकारियों के चलते दोनों के बीच का अंतर खत्म नहीं हो पा रहा है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जहां भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन का दावा कर रही है, वहीं अधिकारियों की कारस्तानी बता रही है कि प्रदेश में सरकारी धन की लूट व धांधली चरम पर है। इसका जीता जागता प्रमाण सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन विभाग है। जल जीवन मिशन के फर्जी आंकड़ों पर योगी सरकार जहां इतरा रही है, वहीं आम जनमानस अधूरे नल से पानी की सप्लाई की उम्मीद खो चुकी है।
सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के अधिकतर जनपद के गांवों में ग्रामीण परिवार को हर घर नल से जल योजना के तहत शुद्ध पानी मिलने लगा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से अधूरे पड़े नल जल जीवन मिशन में व्याप्त भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं। पाइप लाइन डालने के नाम पर सड़कों को तोड़कर बर्बाद कर दिया गया। जबकि विभाग का दावा है कि पाइप लाइन बिछाने के लिए जो सड़कें तोड़ी गईं थीं उसकी मरम्मत करा दी गई है। खैर हकीकत गांवों में जाने पर पता चलती है। पूर्वांचल का शायद ही कोई ऐसा गांव हो जहां हर घर नल से जल योजना का सपना साकार हो पाया हो। ऐसे में हर घर शुद्ध जल पहुंचाने के सरकारी आंकड़े कितने वास्तविक हैं यह समझ से परे हैं।
फिलहाल बस्ती जनपद के गौर विकासखंड के ग्राम बेलघाट, चेरुइया, पतिला, मदरहवा, सिरकोहिया आदि ऐसे गांव हैं जहां करीब तीन वर्षों से अधूरी पाइप लाइन और नल जस की तस स्थिति में बने हैं। वहीं सरकारी आंकड़ों में इन अधूरे नलों से ग्रामीण परिवारों को जलापूर्ति की जा रही है।

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े
उत्तर प्रदेश ने जल जीवन मिशन के तहत एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। प्रदेश में अब तक 26,564 गांवों को ग्राम पंचायत की ओर से हर घर जल प्रमाणित किया जा चुका है। जबकि लगभग ढाई करोड़ ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील गृह नल संयोजन प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि न सिर्फ ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार का प्रमाण है, बल्कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है।
जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में गांव-गांव तक पाइप पेयजल योजना को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। वर्तमान में 97 हजार से अधिक गांवों में पाइप पेयजल योजनाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य तेजी से साकार हो रहा है।

सौर ऊर्जा आधारित मॉडल को प्राथमिकता
प्रदेश सरकार ने पेयजल योजनाओं को दीर्घकालिक और किफायती बनाने के लिए सौर ऊर्जा आधारित मॉडल को प्राथमिकता दी है। आज उत्तर प्रदेश की 80 प्रतिशत ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं ग्रीन एनर्जी पर आधारित हैं। इसके तहत अब तक 33 हजार से ज्यादा ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाएं सौर ऊर्जा आधारित बनाई जा चुकी हैं, जिससे बिजली खर्च में कमी आई है। सोलर आधारित पेयजल योजनाओं से हर साल करीब 13 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाई ऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आ रही है।
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केंद्र सरकार से आए सचिव अशोक कुमार मीना ने उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण), लखनऊ के अन्तर्गत संचालित विकास खण्ड-गोसाईगंज की चांद सराय ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजना का स्थलीय निरीक्षण किया। सचिव ने योजना की गुणवत्ता, तकनीकी दक्षता, अत्यन्त स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित परिसर तथा सम्पूर्ण परियोजना के संचालन को उत्कृष्ट एवं आदर्श बताया।
उन्होंने योजना के अन्तर्गत निर्मित ट्यूबवेल, पंप हाउस, ओवरहेड टैंक, 6 किमी से लंबी वितरण प्रणाली, 486 फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी), 17.50 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट, डीजी सेट तथा क्लोरिनेशन एवं स्वचालन प्रणाली का गहन अवलोकन किया, जिसके बाद परिसर में पौधरोपण भी किया गया। सचिव ने एफएचटीसी से लाभान्वित महिलाओं, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों, ग्राम प्रधान तथा पंप ऑपरेटर से बातचीत की। इस योजना की कुल लागत 260.95 लाख रुपए है।
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