दुर्योधन के इनकार के बाद हुआ था महाविनाशकारी युद्ध, जानें आज के समय में कहां स्थित हैं पांडवों के मांगे गए वो 5 गांव
Pauranik Katha: महाभारत की पौराणिक कथा में जब भगवान श्रीकृष्ण शांतिदूत बनकर हस्तिनापुर की सभा में पहुंचे थे, तब उन्होंने कुरुवंश को विनाश से बचाने के लिए कौरवों से पांडवों के लिए केवल पांच गांव मांगे थे। हालांकि, दुर्योधन ने अपने अहंकार में आकर पांडवों को सुई की नोक बराबर भी जमीन देने से साफ इनकार कर दिया था। इस हठ का परिणाम एक भीषण युद्ध के रूप में सामने आया। आज वे पांचों पौराणिक गांव आधुनिक भारत के दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के समृद्ध शहरों के रूप में पहचाने जाते हैं।
पांडवों की ऐतिहासिक राजधानी इंद्रप्रस्थ
पांडवों ने खांडवप्रस्थ के घने जंगलों को साफ कर अपनी भव्य राजधानी इंद्रप्रस्थ की स्थापना की थी। पुरातत्व विशेषज्ञों और इतिहासकारों के अनुसार, वर्तमान दिल्ली का पुराना किला क्षेत्र ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई खुदाई में यहां से 1000 ईसा पूर्व के टेराकोटा के खिलौने और चित्रित मिट्टी के बर्तन (Painted Grey Ware) मिले हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि यमुना तट पर स्थित यह क्षेत्र महाभारत काल का एक प्रमुख राजनीतिक केंद्र था।
व्याघ्रप्रस्थ, स्वर्णप्रस्थ और पांडुप्रस्थ का आधुनिक स्वरूप
श्रीकृष्ण द्वारा मांगे गए गांवों में पहला गांव व्याघ्रप्रस्थ था, जो जंगली बाघों का गढ़ होने के कारण इस नाम से जाना जाता था। इसे आज उत्तर प्रदेश का बागपत कहा जाता है, जहां पांडवों का प्रसिद्ध लाक्षागृह स्थित माना जाता है। दूसरा गांव स्वर्णप्रस्थ था, जिसे वर्तमान में हरियाणा का सोनीपत शहर कहा जाता है। तीसरा गांव पांडुप्रस्थ था, जिसे आज हम पानीपत के नाम से जानते हैं यह वही ऐतिहासिक धरती है जो मध्यकालीन भारत के तीन बड़े युद्धों की गवाह बनी।
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तिलप्रस्थ, कुरुक्षेत्र और हस्तिनापुर का धार्मिक महत्व
चौथा गांव तिलप्रस्थ था, जिसे वर्तमान में हरियाणा के फरीदाबाद जिले में तिलपत के नाम से जाना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, तिलपत इन सभी स्थलों में सबसे प्राचीन माना जाता है। पांचवें गांव के रूप में अक्सर कुरुक्षेत्र या वृकप्रस्थ का उल्लेख मिलता है। कुरुक्षेत्र का ज्योतिसर वह पवित्र स्थान है जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का दिव्य उपदेश दिया था।
वहीं, कौरवों की मुख्य राजधानी हस्तिनापुर आज उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल के वर्षों बाद गंगा नदी में आई भीषण बाढ़ से यह प्राचीन नगर जलमग्न हो गया था। आज भी ये सभी स्थल आधुनिक भारत के मानचित्र पर महाभारतकालीन इतिहास और भारतीय संस्कृति की जीवंत धरोहर बने हुए हैं।
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