ऐ खुदा कौन सा ये मंजर है
हर तरफ दर्द का समन्दर है। ऐ खुदा कौन सा ये मंजर है। मुल्क में...
हर तरफ दर्द का समन्दर है। ऐ खुदा कौन सा ये मंजर है। मुल्क में...
वक्त यह जैसा कहेगा अब तुम्हें ढलना पड़ेगा आंधियों में ओ मुसाफिर अनवरत चलना पड़ेगा...
परदेश गये मोहे छोड़ पिया। सेजीया सूनी मन खिन्न किये।। काटे ना कटे विरहन रतियाँ।...