Poem: प्रकृति भी रंग पसारे है

प्रकृति भी रंग पसारे है, नववर्ष तुम्हारा आलिंगन! फसलें भी स्वर्ण सरीखी सी, आतुर हैं आने को आंगन। जो बीत गईं वो यादें हैं, आएंगी वो है नव जीवन! बीतीं…

Poem: हारे हुए लोग कहाँ जायेंगे

हारे हुए लोग कहाँ जायेंगे हारे हुए लोगों के लिए कौन दुनिया बसाएगा, उन पराजित योद्धाओं के लिए, तमाम शिकस्त खाए लोगों के लिए। प्रेम में टूटे हुए लोग, सारी…

Poem: गांव की समस्या, गांव में समाधान

कइसन ई शासन है, कइसन विधान है? समस्या है गांव में, नहीं समाधान है। झूठ बोल रहा अब तो सारा जहान है! पागल अब चोर दिखे, चोरी अब शान है!…

Poem: चली-चला!

निशाना लगाया अचूक, फिर भी साला गया चूक। आया कैसा भूचाल, जितने हम थे वाचाल, उतना है बुरा हाल। हम फेल हो गए, पटरी से उतरी रेल हो गए, टूटी…

Poem: बिन कान में लपेटे

है राजनीति का मेरा बस इतना-सा पैमाना, मोदी को गालियों से भरपूर है खजाना। मुझको सभी कहते हैं विकलांग मानसिक हूं, फिर भी बनूंगा पीएम, मम्मी को है दिखाना। वोटों…

Poem: महाकुंभ की मोनालिसा

मैं बेचना चाहती हूँ, बस माला के मनके। पर यहाँ आये हैं, सब लोग अलग-अलग मन के।। इन्हें कहाँ खरीदने हैं, मेरी माला के मनके। ये निहारना चाहते हैं, मेरे…

Poem: “ठंढी में ना जरी अलाव”

माह पूस कै बीति जात है, ठिठुरत है अब शहर औ गांव! माघौ में ना आगी मिलिहै, इहै हकीकत जानि तूं जाव! सरकारी कागज में बाऊ, हर चौराहेप जरा अलाव।…

Poem: जाड़ा बहुत सतावत बा

सरसर हवा बाण की नाईं थर थर काँपैं बाबू माई, तपनी तापैं लोग लुगाई कोहिरा छंटत नहीं बा भाई। चहियै सबै जियावत बा, जाड़ा बहुत सतावत बा।। गरमी असौं बराइस…

Poem: सुकून गाँव में है

सुकून गाँव में है, पेड़ों के छाँव में है। शहर के लोग तो, टेंशन, तनाव में हैं। स्वतंत्र हैं लोग यहाँ, न किसी प्रभाव में हैं। द्वेष में कुछ न…

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