सुरेंद्र कोली ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, निठारी कांड में बरी होने के बाद जी रहा था गुमनाम जिंदगी
Surinder Koli Suicide: नोएडा के चर्चित और वीभत्स निठारी कांड में सभी मामलों से बरी हो चुका सुरेंद्र कोली एक बार फिर सुर्खियों में है। जेल से रिहा होने के बाद गुमनामी का जीवन बिता रहे सुरेंद्र कोली ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। बीते वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा आखिरी मामले में भी बरी किए जाने के बाद वह दिल्ली और फिर हरिद्वार में रह रहा था। संयोग देखिए कि वर्ष 2014 के सितंबर महीने में जिस फांसी के फंदे से वह कानूनी प्रक्रिया के जरिए रातों-रात बच निकला था, 12 साल बाद सितंबर के ही महीने में उसने उसी फंदे को खुद चुन लिया।
जब देर रात 1 बजे टली थी फांसी
सुरेंद्र कोली की आत्महत्या की खबर ने सितंबर 2014 के उस घटनाक्रम की यादें ताजा कर दी हैं, जब उसे मेरठ की सेंट्रल जेल में फांसी दी जानी थी। 7 सितंबर 2014 (रविवार) को खबर आई कि सोमवार को कोली को फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। चूंकि रविवार होने के कारण अदालत बंद थी, इसलिए आनन-फानन में वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने तत्कालीन चीफ जस्टिस आर.एम. लोढ़ा से संपर्क किया। इसके बाद सीनियर जस्टिस एच.एल. दत्तू के आवास पर देर रात विशेष अदालत बैठाई गई।
ओपन कोर्ट में सुनवाई और मिला नया जीवनदान
विशेष अदालत में देर रात करीब 1 बजे सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने दलील दी कि संविधान के तहत मृत्युदंड की सजा से पहले आरोपी को ओपन कोर्ट में एक बार अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए, भले ही रिव्यू पिटीशन खारिज हो चुकी हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए फांसी पर एक सप्ताह की अंतरिम रोक लगा दी। मेरठ के प्रशासनिक अधिकारियों को रातों-रात इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद कोली की फांसी टल गई।
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2025 में मिला था सभी मामलों से छुटकारा
वर्ष 2014 में फांसी टलने के बाद कानूनी लड़ाई लंबी चली और एक-एक कर कोली के खिलाफ मामले कमजोर होते गए। अंततः वर्ष 2025 में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में उसे सभी 13 मुकदमों से बरी कर दिया था। रिहाई के बाद से वह समाज की नजरों से दूर चुपचाप जिंदगी बिता रहा था, लेकिन शुक्रवार को उसकी आत्महत्या की खबर ने इस बहुचर्चित अध्याय का अंत कर दिया।
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