Sawan Rudrabhishekh Rules: सावन में घर पर कराने जा रहे हैं रुद्राभिषेक, तो जान लें नियम और पूजन विधि
Sawan Rudrabhishekh Rules: पवित्र सावन का महीना आते ही चारों तरफ शिव भक्ति का अद्भुत माहौल बन जाता है। इस पावन मास में देवों के देव महादेव को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे उत्तम उपाय रुद्राभिषेक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान यदि विधि-विधान से घर पर रुद्राभिषेक कराया जाए, तो घर में मौजूद सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष दूर हो जाते हैं तथा सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।
हालांकि, शास्त्रों के अनुसार रुद्राभिषेक का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है जब पूजा पूरे नियम और कायदे-कानून से की जाए। यदि आप भी इस बार सावन में अपने घर पर रुद्राभिषेक कराने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ बेहद महत्वपूर्ण नियमों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
स्वच्छता और दिशा का रखें विशेष ध्यान
रुद्राभिषेक की तैयारी हमेशा स्थान की स्वच्छता से शुरू होनी चाहिए।
सफाई: जिस कमरे या स्थान पर पूजा आयोजित की जानी है, वहां की पूरी तरह से सफाई करें। वहां धूल या मकड़ी के जाले बिल्कुल नहीं होने चाहिए।
दिशा का नियम: स्थान पवित्र करने के बाद एक साफ-सुथरा आसन बिछाकर शिवलिंग स्थापित करें। ध्यान रखें कि शिवलिंग का जलाधारी (रुख) हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। वहीं, पूजा में बैठते समय भक्त का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। दिशा को लेकर किसी भी प्रकार का संशय होने पर पहले ही आचार्य या पंडित जी से सलाह लेना उचित रहता है।
सात्विक माहौल और संकल्प के नियम
रुद्राभिषेक वाले दिन घर की पवित्रता बनी रहना अनिवार्य है। इस दिन घर में पूर्णतः सात्विक माहौल होना चाहिए। रसोई में लहसुन, प्याज या किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन बिल्कुल न पकाएं। यदि आप विवाहित हैं, तो पति-पत्नी को एक साथ बैठकर ही पूजा का संकल्प लेना चाहिए। पूजा में मुख्य रूप से बैठने वाले यजमान को अभिषेक संपन्न होने तक निराहार (खाली पेट) रहना चाहिए। अभिषेक करते समय जल, दूध या पंचामृत अर्पित करने के लिए केवल ‘श्रृंगी’ का ही उपयोग करें और ध्यान रखें कि अभिषेक की धार बीच में टूटनी नहीं चाहिए।
इस तरह करें पूजा की शुरुआत और संकल्प
पूजा के दिन सूर्योदय से पूर्व या सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सबसे पहले शिवलिंग पर थोड़ा शुद्ध जल चढ़ाएं और पास में जल से भरा कलश स्थापित करें। अपने दाहिने हाथ में थोड़ा सा जल, अक्षत (चावल) और एक सिक्का लें। अपना नाम तथा गोत्र बोलते हुए मन ही मन रुद्राभिषेक का संकल्प लें और हाथ का जल भूमि पर छोड़ दें। इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ अथवा महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जाप करते हुए निरंतर धार से जल, गंगाजल, दूध या पंचामृत से अभिषेक प्रारंभ करें।
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पूजा का समापन और आरती विधि
अभिषेक पूरा होने के पश्चात शिवलिंग को स्वच्छ कपड़े से पोंछकर चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद भगवान शिव की प्रिय वस्तुएं जैसे बेलपत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, अक्षत और थोड़े काले तिल श्रद्धापूर्वक अर्पित करें। तत्पश्चात शिव चालीसा या रुद्राष्टकम का पाठ करें।
अंत में धूप-दीप से कपूर की आरती उतारें। आरती के बाद जाने-अनजाने हुई किसी भी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा प्रार्थना करें। पूजा समापन के बाद सबसे पहले परिवार व उपस्थित लोगों में प्रसाद वितरित करें और स्वयं भी प्रसाद ग्रहण कर अपना व्रत खोलें।
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