हमारे गणपति कभी विदा नहीं होते, केवल पावन स्नान करते हैं: श्री गुरु शिवाधर
पानीपत/हरिद्वार: हमारे यहाँ गणेश जी का विसर्जन या विदाई नहीं होती, बल्कि उन्हें केवल तीर्थराज हरिद्वार में पावन स्नान कराकर वापस अपने धाम (घर) लाया जाता है। इसी अगाध निष्ठा और सनातन भाव के साथ श्री गुरु शिवाधर दुबे ट्रस्ट (कुटानी रोड, पुराना दलबीर नगर, पानीपत) की पावन हरिद्वार यात्रा अत्यंत भक्तिमय माहौल में संपन्न हुई। कुटानी रोड स्थित आश्रम से जब गजानन को ले जाया जा रहा था, तब ट्रस्ट के संस्थापक व सचिव स्वामी श्री गुरु शिवाधर दुबे महाराज के वचनों को सुनकर सभी श्रद्धालुओं की आँखें छलक आईं। उन्होंने कहा कि प्रभु का वास तो भक्तों के हृदय और इस धाम में सदा-सदा के लिए है, वे केवल माँ गंगा की गोद में स्नान करने जा रहे हैं।

गणपति का वापस अपने घर आना यह बताता है कि ईश्वर कभी दूर नहीं होते: लक्ष्मी शर्मा
इस अलौकिक अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुख्य सेवादार लक्ष्मी शर्मा (प्रदेश अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ भारतीय ब्राह्मण उत्थान महासभा, भारत) ने कहा कि श्रीगणेश महाराज की सेवा और गंगा मैया की गोद में उनका स्नान कराना परम सौभाग्य की बात है। गणपति बाप्पा को विदा न करके, अपने धाम में वापस लाना यह संदेश देता है कि भगवान कभी अपने भक्तों से अलग नहीं होते। उन्होंने कहा कि यात्रा में शामिल माताओं और बहनों के भक्तिमय कीर्तन ने हरिद्वार के पावन तट को साक्षात देवलोक जैसा बना दिया।

हर की पौड़ी पर गूंजे जयकारे
तीर्थ नगरी हरिद्वार के विश्वप्रसिद्ध हर की पौड़ी तट पर श्रीगणेश को पूरे विधि-विधान व वैदिक मंत्रोचार के साथ पवित्र गंगा जल में स्नान कराया गया। इस दौरान श्रद्धालु महिलाओं व माताओं ने भावुक होकर कीर्तन प्रस्तुत किया- “गंगा मैया के पावन जल में कराया स्नान प्रभु को… फिर से अपने धाम लिवा लाए हैं प्यारे गजानन को।” गंगा स्नान का यह पावन कार्य पूर्ण होने के पश्चात गजानन की प्रतिमा को पुनः पानीपत स्थित आश्रम लाया गया।
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श्रीगणेश के पुनः अपने निवास स्थान (कुटानी रोड, पुराना दलबीर नगर, पानीपत) पहुंचते ही संपूर्ण आश्रम परिसर जय श्रीगणेश और हर-हर महादेव के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने बाप्पा का भव्य स्वागत किया। इस पूरे धार्मिक आयोजन में ट्रस्ट के प्रधान ओमप्रकाश, सह सचिव ललिता देवी, खजांची मोहित, मुख्य सेवादार लक्ष्मी शर्मा के साथ सोनिया, नीलम, पूजा, चरणदेवी, संते, सरिता, आंचल, परी, सुमन, कमलेश, अंकिता, कुसुमा, मन्नू, दीपक, बबिता और राजेश समेत बड़ी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
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