Mirzapur News: 11 साल के गुरु ने प्रयागराज में बजाई ऐसी थाप, तबला वादन में मिल गया दूसरा स्थान

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Mirzapur News: सुर, ताल और लय की पावन धरती प्रयागराज में इन दिनों संगीत का एक ऐसा महाकुंभ लगा, जहां प्रतिष्ठित प्रयाग संगीत समिति अपना शताब्दी वर्ष मना रही थी। इस ऐतिहासिक मंच पर मिर्जापुर के एक छोटे से कलाकार ने अपनी थापों से सबका दिल जीत लिया। नाम है ‘गुरु’, और उम्र महज 11 साल।

इस नन्हे कलाकार ने प्रयाग संगीत समिति द्वारा आयोजित प्रदेश स्तरीय संगीत एवं नृत्य प्रतियोगिता में तबला वादन (सोलो) में द्वितीय स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके माता-पिता का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया, बल्कि पूरे मिर्जापुर जिले का मान भी बढ़ाया है।

कला महाकुंभ में बिखेरा जलवा

प्रयाग संगीत समिति के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में यह भव्य कार्यक्रम 14 से 20 मार्च, 2026 तक आयोजित किया गया। सात दिनों तक चले इस कला महाकुंभ में उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से आए नन्हे-मुन्नों से लेकर युवा कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन समिति के अध्यक्ष अजय कुमार, सचिव अरुण कुमार और कोषाध्यक्ष कुशलकांत की देखरेख में हुआ।

निर्णायकों ने की जमकर तारीफ

गुरु की प्रस्तुति को देखकर निर्णायक मंडल भी दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गया। इतनी छोटी उम्र में उनकी स्पष्ट थाप और कठिन लयकारी ने सभी को चौंका दिया। निर्णायकों ने उनकी इस प्रतिभा की जमकर सराहना की और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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कहां सीख रहे हैं संगीत की बारीकियां

गुरु अपनी संगीत यात्रा संगीत संकल्प एकेडमी के माध्यम से तय कर रहे हैं। यहां वे वरिष्ठ संगीत आचार्य पृथ्वी कुमार नारंग जी से तबला वादन की बारीकियां सीख रहे हैं। गुरु की प्रस्तुति को मंच पर और भी प्रभावशाली बनाने में आदर्श विश्वकर्मा ने हारमोनियम पर मधुर लहरा प्रदान कर संगीत की अद्भुत जुगलबंदी पेश की। दोनों के बीच तालमेल ने वहां मौजूद हर श्रोता को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पढ़ाई में भी अव्वल, कला में भी माहिर

गुरु सिर्फ तबले के जादूगर ही नहीं, बल्कि पढ़ाई में भी बेहद मेधावी हैं। वे मिर्जापुर के देहात कोतवाली रोड स्थित अग्रसेन ग्लोरियस स्कूल में कक्षा पांच के छात्र हैं। स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि गुरु हर साल कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करते हैं। यानी उनके अंदर अनुशासन और एकाग्रता दोनों ही कूट-कूट कर भरे हैं।

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उनके पिता, जो मिर्जापुर दीवानी कचहरी में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता (वकील) हैं, बेटे की इस दोहरी सफलता पर फूले नहीं समा रहे हैं। बेटे ने एक तरफ कानून की दुनिया से जुड़े पिता का नाम रोशन किया है, तो दूसरी तरफ संगीत की धुनों से पूरे जिले का नाम ऊंचा किया है।

दिल्ली में भी दिखा चुके हैं हुनर

गुरु की प्रतिभा अब सिर्फ प्रदेश स्तर तक सीमित नहीं रह गई है। हाल ही में उन्होंने नई दिल्ली द्वारा आयोजित सांस्कृतिक प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति योजना (2025-26) के तहत 10 जनवरी 2026 को हुई चयन परीक्षा में भी हिस्सा लिया था। हालांकि इसका परिणाम अभी आना बाकी है, लेकिन उनकी कला के प्रति निष्ठा और लगन को देखते हुए सुखद परिणाम की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। प्रयागराज में इस बड़ी सफलता के बाद गुरु को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। यह नन्हा कलाकार अब मिर्जापुर का सितारा बन चुका है।

रिपोर्ट- अरविंद शर्मा

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