‘भा’रत भारत पुनः खड़ा हो,
स्वामी विवेकानन्द ने बोला था।
स्वर्णिम अतीत को जानेंगे सब,
नव स्वाभिमान पथ खोला था।।

झंझावातों में बढ़ हम सब ने,
है कटक पथ की राह चुनी।
की संकल्पों की सतत साधना,
अग्रेसर हैं गौरव के महाधुनी।।

चुन कर कदम बढ़ाओ आगे,
अब ध्येय मार्ग पर जाना है।
छूट गया था जो भी अब तक,
शुभ लक्ष्य असीमित पाना है।।

समय नहीं अब करें प्रतीक्षा,
कर निज कर्तव्य दिखाना है।
वसुधा सब परिवार हमारा,
फिर रामराज्य युग लाना है।।

– बृजेंद्र

इसे भी पढ़ें: एक दृष्टि

इसे भी पढ़ें: भारत भाग्य विधाता

Like & Share