हौसलों की उड़ान: 10 बार की असफलता भी नहीं डिगा सकी हौसला, बाराबंकी के वेदांत त्रिपाठी सेना में बने लेफ्टिनेंट
बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के एक छोटे से गांव रसूलपुर में आज जश्न का माहौल है। गांव के बेटे वेदांत त्रिपाठी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (CDS) पास कर भारतीय सेना में अधिकारी बनकर इलाके का नाम रोशन किया है। एक साधारण ग्रामीण परिवेश और सीमित संसाधनों के बीच पले-बढ़े वेदांत का चयन लेफ्टिनेंट पद पर हुआ है।
हार नहीं मानने का जज्बा, 10 बार मिली थी असफलता
वेदांत की यह सफलता जितनी सुनहरी दिखती है, उसके पीछे का संघर्ष उतना ही कठिन रहा है। सेना में अधिकारी बनने का जुनून ऐसा था कि वे 10 से ज्यादा बार सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) के इंटरव्यू में असफल हुए। किसी भी सामान्य युवा के लिए इतनी बार असफल होना टूट जाने के लिए काफी होता, लेकिन वेदांत ने हर हार से सीखा और अपने आत्मविश्वास को कम नहीं होने दिया। देशसेवा के इसी जज्बे ने आखिरकार उन्हें सफलता के शिखर पर पहुँचा दिया।
साधारण परिवार, असाधारण उपलब्धि
वेदांत की इस कामयाबी के पीछे उनके माता-पिता का बड़ा हाथ है। उनके पिता अतुल त्रिपाठी एक जनसेवा केंद्र चलाते हैं और माता प्रीति त्रिपाठी एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले वेदांत ने साबित कर दिया कि सेना में अफसर बनने के लिए किसी बड़े शहर या नामी कोचिंग की नहीं, बल्कि अनुशासन और अटूट संकल्प की जरूरत होती है।
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युवाओं के लिए प्रेरणा बने वेदांत
आज वेदांत की सफलता की चर्चा केवल रसूलपुर में ही नहीं, बल्कि पूरे बाराबंकी जिले में है। गांव की गलियों से निकलकर सेना की वर्दी तक पहुँचने का उनका यह सफर उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है, जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। उनकी उपलब्धि ने क्षेत्र के युवाओं को यह संदेश दिया है कि अगर आप अपने सपने के प्रति ईमानदार हैं, तो सफलता एक न एक दिन आपके कदम जरूर चूमेगी।
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