महाराष्ट्र नगर निगम चुनाव: चुनाव से पहले ही महायुति जीत गई 68 सीटें
मुंबई: महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों एक ही खेल चल रहा है नॉमिनेशन वापसी का। आगामी नगर निगम चुनावों के लिए नाम वापस लेने का आखिरी दिन, गुरुवार, राज्य भर में तनाव, सौदेबाजी और कभी-कभी हिंसा का गवाह बना। इसका नतीजा यह रहा कि सत्ताधारी महायुति गठबंधन (भाजपा, शिवसेना-शिंदे, एनसीपी-अजित पवार) ने बिना वोट डले ही 69 में से 68 सीटें अपने नाम कर ली हैं।
शुरुआती बढ़त भाजपा को मिली है, जिसके कुल 44 उम्मीदवार विरोधी खड़े न होने की वजह से सीधे चुन लिए गए हैं। इसके बाद शिवसेना (शिंदे) के 22 और एनसीपी (पवार) के 2 उम्मीदवारों ने भी बिना चुनाव लड़े जीत हासिल की है। लेकिन यह जीत महज आंकड़ों की नहीं रही। इसके पीछे पूरे राज्य में चली ज़ोरदार कोशिशों, गुटबाजी और दुखद हादसों की कहानी है।
हादसा और हंगामे से घिरा रहा दिन
सोलापुर में त्रासदी: चुनावी तनाव के चलते भाजपा के दो गुटों के बीच हुई झड़प में एक पार्टी कार्यकर्ता की मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस को मामला सुलझाने और शांति बहाल करने के लिए तैनात किया गया।
नासिक में विद्रोह: भाजपा द्वारा बाहरी लोगों को टिकट दिए जाने से नाराज स्थानीय कार्यकर्ताओं ने खुला विद्रोह किया। नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच गरमागरम बहस देखी गई।
मुंबई और भिवंडी में बगावत: बीजेपी नेतृत्व के लाख समझाने के बावजूद पार्टी के पांच बागी उम्मीदवार मैदान में डटे रहे। वहीं, भिवंडी में ठाकरे गुट (शिवसेना-UBT) का गठबंधन टूट गया और दोनों धड़ों ने एक-दूसरे के खिलाफ नामांकन भर दिए।
नागपुर में हाउस अरेस्ट: एक बागी भाजपा उम्मीदवार किसान गावंडे को उनके अपने ही समर्थकों ने घर में बंद कर दिया, जब पार्टी के एक वरिष्ठ नेता उन्हें नाम वापस लेने के लिए मनाने पहुंचे। बाद में गावंडे को अपने समर्थकों से ही पार्टी आदेश मानने की गुहार लगानी पड़ी।
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किस पार्टी को कहाँ मिली बढ़त
भाजपा को सबसे ज्यादा निर्विरोध जीत कल्याण (15) से मिली है, इसके बाद भिवंडी, पनवेल और जलगांव (6-6) का नंबर है।
शिवसेना (शिंदे) ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह जिले ठाणे में 7 सीटों पर बिना चुनाव जीत दर्ज की।
कांग्रेस नेताओं ने भी पूरा दिन बागियों को मनाने और संगठन में बड़े पदों का लालच देने में बिताया।
ये सभी घटनाएं 15 जनवरी को होने वाले बृहन्मुंबई नगर निगम समेत राज्य के नगर निकाय चुनावों से पहले की रणनीति और अंदरूनी खींचतान को दिखाती हैं। जबकि महायुति को शुरुआती बड़ी बढ़त मिल गई है, बाकी सीटों पर मतदान के दिन असली मुकाबला देखने को मिलेगा।
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