स्वास्थ्य विभाग का कारनाम, मृतक महिला का 16 दिन बाद लिया कोरोनावारस का सैंपल

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लखनऊ। कोरोनावायरस (Coronavirus) के कहर से जूझ रहे प्रदेश में राज्य सरकार जहां सबकुठ ठीक-छाक होने का दावा कर रही है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद जिलों का दौरा कर वास्तविक स्थिति से रुबरू हो रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही लगातार जारी है। संकट के इस दौर में डॉक्टरों की लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। उत्तर प्रदेश की जहां सबसे ज्यादा कोरोना टेस्ट कराए जाने को लेकर हर जगह तारीफ हो रही है, वहीं जांच के खेल को जानने के बाद आपके भी होश उड़ जाएंगे। सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग ने जांच में जबरदस्त खेल किया है। एक तरफ जहां कोरोना की जांच कराने के लिए मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, वहीं कई ऐसे है जिनका 20 बार जांच कराई जा चुकी है। कुछ ऐसे है जिनकी जांच भी नहीं हुई और जांच रिपोर्ट आ गई।

इसी तरह का एक खेला आगरा में भी सामने आया है। यहां मरीज की मौत के 16 दिन बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसका कोरोना टेस्ट कर डाला। इतना ही नहीं पोर्टल पर बाकायदा जांच रिपोर्ट भी अपलोड कर दी गई। आगरा के गढ़ी भदौरिया निवासी मीरा पत्नी देवेंद्र पाल कोरोनावायरस की चपेट में आ गई थीं। लेकिन सही उपचार न मिल पाने के चलते 22 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। परिजनों ने उसी दिन उनका दाह संस्कार भी कर दिया। मुतका के बेटे महेंद्र के मुताबिक उन्होंन आईएसबीटी पर 20 अप्रैल को अपनी मां का कोरोना टेस्ट कराया था, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी। लेकिन उनकी मां की तबीयत लगातार खराब हो रही थी। इसके चलते उन्होंने इलाज के लिए अपनी मां को रेनबो अस्पताल में भर्ती कराया। यहां जांच कराने पर वह पॉजिटिव पाई गईं।

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इसके बाद बेड न होने की वजह ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। इसके बाद उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाया गया जहां ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था न होने के चलते 22 अप्रैल को उनकी माता का निधन हो गया। इसके कुछ दिन बाद मृतक के बेटे महेंद्र ने जब पोर्टल पर अपनी मां का नंबर डाला तो जो दिखा उससे उसके होश उड़ गए। पोर्टल पर उनकी मां की कोरोना जांच की रिपोर्ट अपलोड थी। चौंकने वाली बात यह थी कि इसमें उनकी मां का सैंपल लेने की तारीख 9 मई अंकित थी और उसी दिन रिपोर्ट भी आ गई थी। जबकि कोरोना की जांच रिपोर्ट एक दिन बाद मिलती है।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य महकमे के इसी फेर में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जांच रिपोर्ट में गउ़बड़ी कोई नई बात नहीं है। सरकार के निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति के लिए स्वास्थ्य महकमा शुरू से ही इसमें खेल करता आ रहा है। इसी का नतीजा रहा कि कई ऐसे मामले आए जिनमें सैंपल लिया ही नहीं गया और जांच रिपोर्ट आ गई। हालांकि अभी तक ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई भी नहीं की गई। इस पर कुछ लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य महकमे ने सरकार को खुश करने के लिए ऐसा किया है, जबकि सरकार इस बात पर इतरा रही है कि हमारे राज्य में सबसे ज्यादा कोरोना का टेस्ट किया गया है।

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