वेबिनार में उठी कोविड की उत्पति की विस्तृत जांच की मांग

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नई दिल्ली। एबी फाउंडेशन के तत्वावधान में “करोना का दूसरा कहर आखिर है क्या बला और कोविड की जंग जीतने के बाद की सतर्कता” जैसे प्रासंगिक विषय पर आयोजित वेबिनार में देश के जाने माने चिकित्सा विशेषज्ञों के पैनल सहित सभी ने सर्वसम्मति से यह मांग की कि चीन से निकले इस बहुरूपिये वायरस की उत्पति कहां से हुई और इस बात की जांच हो कि यह कहीं मानव निर्मित तो नहीं?

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में देश के पूर्व थल सेनाध्यक्ष एवं केंद्र सरकार के राज्य मंत्री वीके सिंह ने लोगों को अपना मनोबल तथा सकारात्मकता को अपने जीवन शैली में शामिल करने को आवश्यक बताया। उन्होंने लोगों से इस महामारी के दौरान संयम बनाकर रखने की भी अपील की तथा किसी भी तरह की आर्थिक लूटपाट किए जाने वाले कुकृत्यों को काफी दुखद बताते हुए कड़ी कार्रवाई का आह्वान किया।

जनरल सिंह ने कहा कि चीन कभी भी भारत का भला नहीं चाहेगा। वह हमारे देश को एशिया में अपना सबसे कट्टर प्रतिद्वंद्वी मानता है। साउथ चाइना सी को मुक्त रखने के अभियान के तहत क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, आस्ट्लिया) के गठन से चीन जल रहा है। चूंकि इस समय भारत और जापान दो देश ही इस महामारी की भयावहता से जूझ रहे हैं, इससे चीन के वायरस को लेकर की जा रही कारस्तानी की आशंका को बल मिल रहा है।

कोविड को लेकर वेबिनार में प्रयागराज के अनुभवी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने जहां करोना के विभिन्न प्रकार तथा इससे रिकवरी के उपरांत लिए जाने वाले प्रिकॉशंस की जानकारी दी, वहीं कार्यक्रम के दूसरे वक्ता दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राजेश कोहली ने कोरोना को मात देने पर मरीजों के पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देने तथा उसे अपने दैनिक जीवन में शामिल करने की जरूरत पर बल दिया। तीसरे वक्ता मुंबई के आयुर्वेदाचार्य डॉ. अनिल शुक्ला ने जहां लोगों को दिनचर्या तथा अपने खानपान में सुधार की जरूरत बताया, वहीं इससे बचने के लिए लोगों को अपने जीवन में योग एवं प्राणायाम को आज की अनिवार्य जरूरत करार देते हुए कहा कि कोरोना को मात देने वाले व्यक्तियों के लिए ये मानसिक तथा शारीरिक तौर पर काफी मददगार साबित होंगे।

चौथे वक्ता उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के अनुभवी डाक्टर व पैथोलॉजिस्ट डॉ. डीएस मिश्रा ने अपने सारे अनुभवों को लोगों के साथ साझा किया। वेबीनार का सार तत्व यह था कि कोरोना की इस दूसरी लहर से उबरने के उपरांत शरीर में फंगस या अन्य विकारों को लेकर तनाव में आने की जरूरत नहीं। जरा भी असहजता महसूस होने पर तत्काल डाक्टर से परामर्श करें। समय रहते उपचार से विकार घातक नहीं होने वाले।

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कार्यक्रम में एबी फाउंडेशन के सलाहकार, वरिष्ठ पत्रकार एवं नेशन टुडे के मुख्य संपादक पदम पति शर्मा ने इस महामारी में पड़ोसी देश चीन की भारत पर जैविक युद्ध छेड़ने की साजिश की आशंका जताते हुए कहा कि ऐसी जानलेवा लहर सिर्फ भारत में ही क्यों? भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य देश इससे अछूते कैसे? उन्होंने कहा कि ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिक इस वायरस की उत्पत्ति की जांच की मांग कर चुके हैं। उन्होंने भारत सरकार से इस मामले को उचित मंच पर उठाते हुए उपयुक्त जांच करने की मांग की अपील की।

कार्यक्रम में एबी फाउंडेशन के ट्रस्टी एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट सीके मिश्रा ने फाउंडेशन की ओर से गत वर्ष लगातार छह महीने तक प्रति सप्ताह आत्मनिर्भर भारत अभियान को अंतर्गत भिन्न सकारात्मक विषयों पर गुणिजनों को आमंत्रित कर आयोजित वेबिनारों की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम के मॉडरेटर कानपुर से रवि पांडे ने हमेशा की तरह अपनी भूमिका एवं जिम्मेदारी का सफल निर्वहन किया। अंत में अपने धन्यवाद ज्ञापन में कोलकाता के अधिवक्ता आनंद कुमार सिंह ने समस्त वक्ताओं, विशिष्ट अतिथि, श्रोताओं तथा टीम के साथियों का आभार प्रकट किया। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत अपने कौशल, हिम्मत, संयम तथा हौसले से इस महामारी को मात देकर वैश्विक महाशक्ति के रूप में निस्संदेह उभरेगा।

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