श्रीराधा-कृष्ण के दिव्य विवाह का साक्षी भांडीरवन, जानिए इस अलौकिक धाम का पौराणिक रहस्य
Radha Krishna Marriage Place: धार्मिक ग्रंथों और सनातन परंपरा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाभूमि ब्रज को अत्यंत अलौकिक और रहस्यमयी माना गया है। वृंदावन के 12 मुख्य वनों में शामिल ‘भांडीरवन’ एक ऐसा ही परम पवित्र और अलौकिक स्थल है, जो द्वापर युग में श्री राधा-कृष्ण के अति-गोपनीय और दिव्य विवाह का प्रत्यक्ष साक्षी बना। आम जनमानस में यह धारणा बनी रहती है कि श्रीराधा-कृष्ण का सांसारिक विवाह नहीं हुआ था, लेकिन शास्त्रों और ब्रज की प्राचीन परंपराओं के मुताबिक स्वयं जगत्पिता ब्रह्मा जी ने भांडीरवन में पुरोहित की भूमिका निभाते हुए दोनों का वैदिक रीति-रिवाज से विवाह संपन्न करवाया था। आज भी यह पावन धाम अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा, अनन्य भक्ति और अलौकिक शांति का केंद्र बना हुआ है।
अचानक आया आंधी-तूफान और प्रकट हुईं राधारानी
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार नंदबाबा बाल-कृष्ण को अपनी गोद में लेकर भांडीरवन के घने जंगल से गुजर रहे थे। उसी दौरान भगवान श्रीकृष्ण की इच्छा मात्र से अचानक संपूर्ण ब्रजमंडल में भयंकर आंधी-तूफान आ गया। बाल-कृष्ण की सुरक्षा को लेकर चिंतित नंदबाबा घबरा गए और वे एक विशाल वटवृक्ष की आड़ में खड़े हो गए। ठीक उसी समय वहां साक्षात श्री राधारानी का दिव्य प्राकट्य हुआ। नंदबाबा दोनों के परम अलौकिक स्वरूप से भली-भांति परिचित थे, इसलिए उन्होंने बाल-कृष्ण को राधारानी की गोद में सौंप दिया और दोनों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम कर वहां से प्रस्थान कर गए।
नंदबाबा के जाते ही आंधी-तूफान पूरी तरह थम गया और बाल-कृष्ण ने अपना पूर्ण पुरुषोत्तम रूप धारण कर लिया। इसके बाद भगवान की योगमाया शक्ति के प्रभाव से वहां ब्रह्मा जी का प्राकट्य हुआ। ब्रह्मा जी ने आचार्य बनकर पूर्ण वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ श्री राधा और श्रीकृष्ण का विवाह संस्कार संपन्न कराया।
वरमाला पहनाते श्रीराधा-कृष्ण और प्रलंबसुर वध का साक्षी बना यह पावन परिसर
भांडीरवन के मुख्य मंदिर की अलौकिकता देखते ही बनती है। मंदिर परिसर में एक प्राचीन विशाल वटवृक्ष के नीचे श्रीराधा-कृष्ण का अति-सुंदर विग्रह स्थापित है, जिसमें वे एक-दूसरे को वरमाला पहनाते दिख रहे हैं और ब्रह्मा जी नीचे बैठकर विवाह की रस्में पूरी करवा रहे हैं। इसके साथ ही विवाह स्थल के ठीक समीप बलराम जी का ऐतिहासिक मंदिर स्थित है। यह वही स्थान है, जहां भगवान बलराम ने कंस द्वारा भेजे गए बलशाली दैत्य प्रलंबसुर का वध कर ब्रजवासियों की रक्षा की थी।
भांडीरवन का गोपनीय रहस्य, 1 घंटे के प्रवास में मिलता है 1 कल्प के भजन का फल
श्रीमद्भागवत एवं ब्रज के शास्त्रों के अनुसार, भांडीरवन की महिमा अत्यंत दुर्लभ है। माना जाता है कि इस पावन धाम में केवल 1 घंटा बिताना 1 कल्प (लगभग 4.32 अरब वर्ष) तक निरंतर जप और तप करने के बराबर पुण्य फल प्रदान करता है। स्थानीय संतों और श्रद्धालुओं की दृढ़ मान्यता है कि इस अलौकिक स्थान पर हर कोई अपनी मर्जी से नहीं पहुंच पाता, बल्कि यहां केवल वही भक्त कदम रख पाते हैं, जिन्हें स्वयं श्री राधारानी की कृपा का बुलावा आता है।
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वंशीवट का अलौकिक चमत्कार
भांडीरवन से महज 600 मीटर की दूरी पर प्रसिद्ध ‘वंशीवट’ स्थित है। मान्यता है कि इस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण अपने सखा ग्वाल-बालों के साथ बैठकर माखन-मिश्री का भोजन करते थे और अपनी मोहिनी वंशी बजाकर राधारानी तथा गोपियों को आमंत्रित करते थे। वंशीवट में एक विशेष प्राचीन वृक्ष है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यदि कोई निष्पाप और सच्चा साधक अपने कान इस पेड़ के तने पर लगाए, तो उसे आज भी भीतर से रासलीला के मृदंग की मधुर और अलौकिक ध्वनि सुनाई देती है।
कैसे पहुंचे भांडीरवन
यदि आप भांडीरवन के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो वृंदावन से हाईवे मार्ग के जरिए यह पावन स्थल लगभग 21 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां आप अपनी निजी गाड़ी या कैब के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं। इसके अलावा, मानसून के समय को छोड़कर अन्य दिनों में आप केशी घाट से नाव द्वारा यमुना पार करके बेलवन के रास्ते बाइक या पैदल मात्र 8 किलोमीटर की दूरी तय करके भी भांडीरवन पहुंच सकते हैं।
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