बंगाल चुनाव परिणाम: स्वर्णिम भविष्य का संकेत

Election Results 2026
Mrityunjay Dixit
मृत्युंजय दीक्षित

बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम अभूतपूर्व हैं, अभिभूत करने वाले हैं। भाजपा की लम्बी अनथक साधना, कार्यकर्ताओं का कठोर श्रम, कुशल रणनीति, बंगाल के मतदाताओं का किसी भी प्रकार के भय से उबर कर मतदान करना जैसे कारकों ने मिलकर लंबी प्रतीक्षा के बाद भाजपा (भारतीय जनसंघ) के संस्थापकों में से एक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जन्मस्थली बंगाल में कमल खिला दिया है। आज बंगाल के धर्मयोद्धा अभय होकर जयश्रीराम, वंदेमातरम और भारत माता की जय का उद्घोष कर रहे हैं।

बंगाल की जनता तृणमूल सरकार की अराजकता, कटमनी, मुस्लिम तुष्टिकरण और बांग्लादेशी घुसपैठियों व रोहिग्याओं से तंग आ चुकी थी। महिला सुरक्षा उपहास बन चुकी थी स्वयं मुख्यमंत्री बेटियों को शाम के बाद घर से बाहर न निकलने को कहती थीं, सरकार ने आरजी कर की वीभत्स घटना में अपराधियों को संरक्षण दिया था उससे टूट कर बंगाल का हिंदू जनमानस करो या मरो की स्थिति में पहुंचकर एकजुट हुआ और 93 प्रतिशत मतदान करके 20 हजार करोड़ से अधिक घोटालों वाली निर्मम ममता सरकार को उखाड़ फेंका।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती पर भाजपा का सूर्योदय भारत की राजनीति में व्यापक बदलाव लाने वाला है। बंगाल की जनता ने घुसपैठ, तुष्टिकरण और हिंसा की राजनीति को नकार कर विकास, सुरक्षा और सुशासन का मार्ग चुना है। बंगाल की असुरक्षित नारी शक्ति, रोजगार के लिए बार-बार पलायन करते युवा, डर-डर कर जीते बुजुर्ग और घुसपैठियों द्वारा अपनी माँ- माटी और धर्म को अपमानित होते देखने वाले मध्यमवर्गीय सभी ने भाजपा पर विश्वास जताया है।

बंगाल में लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बने रहने के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अथक प्रयास किए। बाहरी बनाम भीतरी और बंगाली अस्मिता के साथ ही मछली, मांस और क्षेत्रीय गौरव के भावनात्मक मुद्दों को हवा दी। चुनाव आयोग के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। एसआईआर से लेकर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती तक का तीखा विरोध किया। मतदाता सूची गहन पुनरीक्षण जैसी फर्जी और अवैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को रुकवाने का भरपूर प्रयास किया।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बहस के लिए स्वयं सुप्रीम कोर्ट पहुँच गयीं। एसआईआर रुकवाने व अन्य मुद्दों पर चुनाव आयोग के खिलाफ कुल मिलाकर 80 याचिकाएं दायर कर इतिहास रच दिया। किंतु इनमें से कोई भी मुद्दा इस बार जनता को बहका नहीं सका, क्योंकि ये मुद्दे जनता के थे ही नहीं। जनता के अपने मुद्दे थे– सुरक्षा, भ्रष्टाचार से मुक्ति, शांति, रोजगार, घुसपैठियों से मुक्ति, अपने त्योहार मनाने का अधिकार जिसके लिए उसने प्राणों की बाजी लगाकर भी भाजपा को वोट दिया है।

West Bengal election

बंगाल में भाजपा की विजय को महिलाओं की मैान क्रांति भी कहा जा सकता है, क्योंकि दो चरणों में संपन्न हुए मतदान के दौरान मतदान केन्द्रों पर पुरुषों की तुलना में महिलाओ की कतारें अधिक लम्बी थीं जो संकेत दे रही थीं कि अब लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं से उनका मोहभंग हो चुका है उस पर सुरक्षा और सम्मान भारी पड़ रहा है। संदेशखाली ओैर आरजी कर जैसी घटनाओं के कारण महिलाओं के मन का आक्रोश ममता समझ नहीं सकीं। संदेशखाली से लेकर आरजी कांड तक ममता बनर्जी की सरकार आरोपियों के साथ खड़ी थी।

बंगाल में मुस्लिम तुष्टिकरण का विकृत खेल चल रहा था। ममता बनर्जी को जय श्रीराम के नारे से नफरत हो गई थी। अयोध्या में होने वाले दिव्य-भव्य राम मंदिर का कार्यक्रम बंगाल के लोग टीवी पर भी न देख सकें इसके लिए सरकार ने अपनी मशीनरी का पूरा दुरुपयोग किया। श्रीराम के नाम से ममता को इतनी घृणा हो गई थी कि उन्होंने बंगाली भाषा में जो इन्द्रधनुष को रामधोनु कहा जाता है उसको बदलकर रंगधोनु कर दिया था। रामनवमी पर शोभायात्रा निकालना, बसंत पंचमी का पर्व मनाना एक गंभीर समस्या बन गया था। गौ तस्करी, सरेआम गोवध का बोलबाला हो गया था। स्वाभाविक है बंगाल का हिन्दू त्राहि-त्राहि कर रहा था। इसी को भांप कर बंगाल बीजेपी के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि बंगाल में हिंदुओं व सनातन की रक्षा के लिए भाजपा का जीतना जरूरी है, नहीं तो बंगाल में हिंदू समाप्त हो जाएगा।

भाजपा इस बार बंगाल में भाषाई और क्षेत्रवाद की दीवार गिराकर जनता को यह भरोसा दिलाने में सफल रही कि वह “बाहरी“ नहीं बल्कि उनकी अपनी है। भाजपा बंगाल की जनता को यह समझाने में सफल रही कि घुसपैठ व डेमोग्राफी में बदलाव की समस्या का हल वही कर सकती है। प्रधानमंत्री मोदी के भय बनाम भरोसे का नारा दिलों को छू गया। वह हर जनसभा में कहते थे कि भय जा रहा है और भरोसा आ रहा है, जिसका असर चुनाव परिणामों में स्पष्ट दिखाई पड़ा है। बंगाल विजय के लिए इस बार भाजपा ने पूरी ताकत लगा दी और किसी प्रकार की कोई गलती नहीं की। वर्ष 2021 में जो कमियां रह गयीं थीं उन पर काम किया गया और परिणाम सामने है।

वर्ष 2024 तक पूरे बंगाल में चुनावी हिंसा आम बात थी, रक्तरंजित चुनाव का इतिहास है बंगाल का। इस बार चुनाव आयोग की सख्ती और भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती से जनता में भरोसा जगा और वह भारी संख्या में मतदान केंद्रों पर पहुंची।

भाजपा की विजय का एक अन्य कारण उम्मीदवारों का चयन भी रहा। भाजपा ने राज्य में ऐसे अनेक चेहरों को आगे किया जो सत्ता की राजनीति से दूर झोपड़ियों और खेतों में अपना पसीना बहाते रहे हैं। सन्देशखाली की रेखा पात्रा, आर जी कर पीड़िता की माँ और दूसरों के घरों में काम करने वाली मेहनतकश सामान्य स्त्री, ऐसे प्रत्याशी जिनमें सब अपने को पहचान सकें। ये आज विधायक हैं। भाजपा को विजयी बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सहित सभी चालीस स्टार प्रचारकों ने कड़ी मेहनत की।

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बंगाल वामदलों के कुशासन से पीड़ित लोगों ने ममता को एक नहीं तीन बार मौका दिया किंतु बंगाल की जनता की समस्याएं बढ़ती ही चली गयीं जिस कारण आक्रोश भी बढ़ता चला गया। बंगाल की जनता की आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय हो चुकी है। इलाज का खर्च बेतहाशा है कितु सुविधाएं नहीं के बराबर हैं। ममता अपने अहंकार के कारण केंद्र की कल्याणकारी योजनाओं को लागू नहीं कर रही थीं।

बंगाल में भाजपा की विजय बहुत बड़ी व ऐतिहासिक है जिसका प्रभाव देश की राजनीति में दूर तक जाएगा, राज्यसभा में संख्याबल बदलेगा। यह जीत देश को घुसपैठियों, आतंकवादी गतिविधियों और हमलों से बचाएगी। चिकननेक सुरक्षित रहेगा। पूर्वोत्तर राज्य सुरक्षित होंगे। बांग्लादेश की सीमा से होने वाली गो तस्करी रोकी जा सकेगी। भारत की सीमा सुरक्षित होगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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