राम मंदिर की जमीन में करोड़ों रुपयों का खेल, जानें विपक्षी दावों में क्या है सच्चाई

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Shri Ram Janmabhoomi

राममूर्ति मिश्र

बस्ती: दिल्ली का रास्ता अगर उत्तर प्रदेश से होकर जाता है, तो अयोध्या राम मंदिर की सियासत से उत्तर प्रदेश की सत्ता में आया जा सकता है। इस बात को बीजेपी भी जानती है और विपक्ष भी। तभी तो दशकों से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अयोध्या राम मंदिर मुद्दा बना रहा। यह अलग बात है कि राम मंदिर के पक्ष में आने पर कल्याण सिंह की सरकार चली गई, जबकि कारसेवकों पर गोली चलवा कर मुलायम सिंह नेतृत्व वाली सपा सरकार में बनी रही। अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद मंदिर निर्माण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। ऐसे में विपक्ष की तरफ से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर अयोध्या राम मंदिर को लेकर सियासत तेज हो गई है।

इस बार अयोध्या में जारी राम मंदिर निर्माण कार्य की गतिविधियां राजनीति के केंद्र में आ गई है। विपक्षी दलों के नेताओं ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर अरोप लगाते हुए बीजेपी को घेरने की कोशिश की है। ट्रस्ट पर आरोप है कि उसने मात्र 10 मिनट में दो करोड़ की जमीन 18 करोड़ रुपए में खरीदी है। मतलब जो जमीन पहले दो करोड़ रुपए की थी उसकी 10 मिनट बाद 18 करोड़ रुपए में खरीदा गया।

गौरतलब है अयोध्या प्रदेश के साथ-साथ देश की सियासत की धुरी रही है। चुनाव कोई भी रहा हो अयोध्या राम मंदिर हर चुनाव में मुद्दा रहा। तभी तो ‘राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे और मिले मुलायम-कांशी राम हवा हो गए जय श्री राम, जैसे हमारे बीच गूंज चुके हैं और इसके असर को सबने महसूस भी किया है। अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। ऐसा माना जा रहा था कि उत्तर प्रदेश की सियासत से अब राम मंदिर का मुद्दा खत्म हो गया है। लेकिन विपक्ष की तरफ से निर्माण कार्य से जुड़े श्री राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आरोप लगाकर एक बार फिर राम मंदिर की सियासत को हवा देने का काम शुरू कर दिया गया है। विपक्ष पांच मिनट में करोड़ों की हेराफेरी का अरोप लगा रहा है। लेकिन सवाल यह भी है कि ट्रस्ट ने आखिर किन वजहों से ये जमीन इतने मंहगे दामों पर खरीदी। ऐसी क्या मजबूरी थी जिसके चलते मंहगे दामों पर जमीन खरीदनी पड़ी।

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जमीन खरीद के लिए ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि ट्रस्ट का इतने मंहगे दाम पर खरीदनी पड़ी इसके कई कारण हो सकते हैं। लेकिन इन कारणों को जाने वैगर घोटाले के आरोप लगाने को भी जायज नहीं ठहराया जा सकता। दस्तावेजों का हवाला देते हुए आम आदमी पार्टी नेता ने इस पूरे मामले की जांच सीबीआई और ईडी से कराने की मांग की है। वहीं सपा नेता पवन पांडेय ने भी ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की जांच कराने की मांग की है। ऐसे में कांग्रेस कहा पीछे रहने वाली है, कांग्रेस नेता दीपक सिंह ने बीजेपी पर अयोध्या राम मंदिर की जमीन घोटाला, मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे का घोटाला करने का आरोप लगा डाला।

ट्रस्ट ने आरोपों को बताया निराधार

जमीन खरीद को लेकर उठ रहे सियासी बवंडर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव ने बाधिकारिक पत्र जारी करते हुए इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा है कि मंदिर निर्माण में वास्तु के मुताबिक सुधार के लिए मंदिर परिसर के पूर्व और पश्चिम दिशा में यात्रा को और सुलभ बनाने तथा मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए कुछ छोटे-बड़े मंदिर और गृहस्थों के मकान को खरीदना जरूरी है। इसी परिदृश्य से मकान खरीदा जाएगा, उन्हें ऐसे लोगों को पुनर्वास के लिए जमीनें दी जाएंगी। इस काम के लिए ट्रस्ट की तरफ से भूमि की खरीदारी की जा रही है। साथ ही चंपत राय ने अपने पत्र में कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने अभी तक जितनी जमीनें खरीदी हैं, वह खुले बाजार की कीमत से काफी कम हैं। आरोप लगाने वाले लोग राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित होकर भ्रम फैला जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

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