न्यायिक और पुलिस आधुनिकीकरण के बिना नया भारत नामुमकिन

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नई दिल्ली: हम जिस सुशासन और गुड गवर्नेंस की बात करते हैं, जिस नये भारत निर्माण की हम परिकल्पना कर रहे हैं, ये सब तभी मुमकिन हो सकता है जब देश की सरकार न्यायिक और पुलिस पुनर्सुधार के लिए गंभीरता के साथ डेढ दशक से ज्यादा समय से धूल खा रही संसुस्तियों को लागू करने का साहसिक कदम उठाएगी। “नये भारत के लिए पुलिस आधुनिकीकरण तात्कालिक जरूरत” विषयक आयोजित वेबिनार में विशेषज्ञ त्रिमूर्ति ने एक सुर में यही कहा।

देश एक, झंडा एक, संविधान एक तो कानून और दंड संहिता भी एक होनी चाहिए। देशहित- लोकहित में सौ से भी ज्यादा आईपीएल दायर कर चुके सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने बतौर प्रथम वक्ता अपने संबोधन में कहा कि देश में रूल आफ द ला नहीं रुलर आफ द ला है। हम भीड़ तंत्र में जी रहे हैं। 160 वर्ष पुराने पुलिस और जुडिशियल एक्ट में आमूल चूल बदलाव समय की मांग है। हम फ्रांस, इजरायल, रूस और अमेरिका से अरबों खरबों डालर के अस्त्र-शस्त्र खरीद सकते हैं तो क्यों नहीं हम मुफ्त में इन देशों के कानून और दंड संहिता लेकर उन्हें अपने यहां लागू करें।

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उपाध्याय ने अपनी वेदना सभी के साथ साझा करते हुए देश में लोकतंत्र से ज्यादा भीड़ तंत्र की भूमिका को अधिक प्रभावी माना, जो समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है । उन्होंने कहा के देश में हजारों की संख्या में रिटायर्ड आईपीएस तथा सुप्रीम, हाई कोर्ट के जज उपलब्ध है। उनमें से कुछ को एक पैनल में शामिल करते हुए उनके अनुभव का लाभ उठाकर भविष्य के मद्देनजर एक मॉडल पुलिस एक्ट बनाना क्या आज के समय की मांग नहीं है? साथ ही साथ उन्होंने आजादी से पहले के अप्रासंगिक हो चुके कानूनों को समाप्त कर उनकी जगह एक प्रभावशाली कानून बनाने पर बल देते हुए कहा कि आमजन को इससे त्वरित न्याय मिलेगा। उन्होंने 70 लाख करोड की भारतीय अर्थव्यवस्था में व्याप्त काले धन पर अविलंब कंट्रोल करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भ्रष्टाचार से उत्पन्न रकम का इस्तेमाल देश विरोधी उद्देश्यों के लिए होता है, जो विनाशकारी है।

कार्यक्रम के दूसरे स्पीकर बिहार के रिटायर्ड पुलिस महानिदेशक और बहुचर्चित सुपर- 30 के सह संस्थापक शिक्षाविद अभयानंद ने पुलिस और जुडिशियली के साथ संपर्क की जरूरत बताते हुए कहा कि पुलिस तंत्र में फॉरेंसिक साइंस को अधिक प्रभावशाली बना कर इसका ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैने इसके लिए अपने कार्यकाल के दौरान एक बार पुलिस और न्यायिक व्यवस्था से जुडे लोगों को एक मंच पर लाकर सुधार प्रक्रिया की कोशिश की थी।

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उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी आनंद लाल बनर्जी ने अपने अभिभाषण में पुलिस तंत्र में विभिन्न कमीशन का जिक्र करते हुए उन्होंने अनुसंधान तथा कानून व्यवस्था को अलग करने की भी वकालत की। उन्होंने पुलिस तंत्र में सुधार के साथ ही जुडिशियली में भी पुनर्सुधार पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सिर्फ पुलिस आधुनिकीकरण के सहारे न्यायिक व्यवस्था को प्रभावशाली नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने आने वाले वर्षों में साइबर क्राइम, जैविक तथा स्पेस वार की भी आशंका जताते हुए उसी के अनुरूप सिस्टम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने एक मॉडल पुलिस कोड बनाने की भी जरूरत बताया।

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कार्यक्रम में संस्था के मार्गदर्शक तथा वरिष्ठ पत्रकार पदम पति शर्मा ने सक्रिय पत्रकारिता में कार्यकाल के दौरान पुलिस व न्यायिक व्यवस्था में अपने कटु अनुभव को साझा किया करते हुए विषय की प्रस्तावना रखी। एबी फाउंडेशन के ट्रस्टी आर्थिक मामलों के जानकार तथा वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट सी के मिश्रा ने फाउंडेशन की ओर से किए वेबिनार कार्यक्रमों की जानकारी दी।

वेबिनार के माडरेटर द्वय डॉक्टर सुरभि पांडेय तथा रवि पांडेय ने कार्यक्रम का पेशेवराना अंदाज में सफलतापूर्वक संचालन किया। कार्यक्रम के अंत में संस्था की ओर से धन्यवाद ज्ञापन प्रस्ताव में अधिवक्ता आनंद कुमार सिंह ने समस्त वक्ताओं, श्रोताओं तथा मोजूद पत्रकारों का शुक्रिया अदा करते हुए विश्वास जताया कि पुलिस आधुनिकीकरण की दिशा में आज की यह वेबिनार आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगी।

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