पुलिस चौकियों की आड़ में अवैध विज्ञापनों का बड़ा खेल, नगर निगम को हर साल लग रहा करोड़ों का चूना
Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अवैध विज्ञापनों के नाम पर नगर निगम को हर साल करीब 3 करोड़ रुपये के राजस्व का भारी नुकसान पहुँचाया जा रहा है। हैरान करने वाली बात यह है कि यह पूरा अवैध कारोबार कहीं और नहीं, बल्कि शहर की पुलिस चौकियों की आड़ में धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। नगर निगम प्रचार अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थानों पर बिना अनुमति के कोई भी विज्ञापन बोर्ड लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है, इसके बावजूद सैकड़ों पुलिस चौकियों पर नामी-गिरामी कंपनियों के बड़े-बड़े होर्डिंग्स चमचमा रहे हैं।
सिर्फ कुछ चौकियों की थी अनुमति
सूत्रों के मुताबिक, एक बड़े ऑटोमोबाइल शोरूम द्वारा कुछ पुलिस चौकियों और बूथों के निर्माण का जिम्मा लिया गया था। इसके एवज में निगम के रिकॉर्ड के अनुसार केवल चुनिंदा चौकियों पर ब्रांड प्रचार की अनुमति माँगी गई थी, लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि शहर की 400 से अधिक पुलिस चौकियाँ विज्ञापनों का अड्डा बन चुकी हैं। इस आंतरिक सांठगांठ को लेकर नगर निगम के प्रचार विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर उन्हें ये होर्डिंग्स क्यों नजर नहीं आते।
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नगर निगम ने दिए जांच और कार्रवाई के संकेत
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नगर निगम के प्रचार विभाग के प्रभारी विनीत सिंह ने स्पष्ट किया है कि केवल चुनिंदा चौकियों को ही विज्ञापन की अनुमति दी गई थी। अन्य चौकियों पर अवैध रूप से प्रचार करने वाली कंपनियों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया जाएगा और संतोषजनक जवाब न मिलने पर कड़ी विधिक कार्रवाई की जाएगी। नियमों के मुताबिक, सरकारी या अर्द्धसरकारी संपत्तियों पर व्यावसायिक विज्ञापन के लिए निगम से अनुमति और तय शुल्क जमा करना अनिवार्य होता है।
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