UP Assembly Election 2027: सीटों के चुनाव में उलझी सपा और कांग्रेस, जानें सीटों की स्थिति
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। राज्य में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व वाले एनडीए और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस के इंडिया अलायंस (INDIA Alliance) के बीच बनता दिख रहा है। हालांकि, गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच बड़ा भाई बनने की खींचतान भी लगातार सामने आ रही है। आइए आंकड़ों के जरिए समझने की कोशिश करते हैं कि ज़मीनी हक़ीक़त के आधार पर दोनों दलों में बड़ा भाई वास्तव में कौन है।
2022 के चुनावी आंकड़ों में सपा और कांग्रेस की स्थिति
साल 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। अन्य दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ने वाली सपा ने 403 में से अकेले 111 सीटों पर जीत दर्ज की थी। पार्टी को कुल 32.76 फीसदी वोट शेयर के साथ 2 करोड़ 95 लाख 43 हजार 934 वोट मिले थे।
वहीं कांग्रेस ने राज्य में अकेले चुनाव लड़ा था और उसे महज 2 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी। कांग्रेस का कुल वोट शेयर 2.39 फीसदी रहा था और उसे कुल 21 लाख 51 हजार 234 वोट मिले थे। (बता दें कि 2022 में कुल 15 करोड़ 19 लाख से अधिक रजिस्टर्ड वोटर्स में से 60.2% यानी 9.15 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया था।)
सीटों का गणित और कांग्रेस की जमीनी दावेदारी
अगर सीटों के प्रदर्शन का गहराई से विश्लेषण करें तो तस्वीर साफ हो जाती है। कांग्रेस ने 2022 में 403 में से 2 सीटें जीती थीं। इन दो सीटों के अलावा केवल 19 सीटें ऐसी थीं जहां कांग्रेस को 20 हजार से अधिक वोट मिले। 21 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को 10 हजार से 20 हजार के बीच वोट मिले, जबकि 31 सीटों पर उसे 5 हजार से 10 हजार के बीच वोट हासिल हुए। इस तरह (2 विधायक + 19 + 21 + 31) कुल 73 सीटें ऐसी बैठती हैं जहां कांग्रेस को पांच हजार से ज्यादा वोट मिले थे।
इनमें से भी 16 सीटें ऐसी थीं जिन पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विजयी हुए थे। यदि सिटिंग विधायकों वाली सपा की इन 16 सीटों को हटा दिया जाए, तो पांच हजार वोटों के आधार पर कांग्रेस की मजबूत दावेदारी केवल 57 सीटों पर ही बनती है। इसके उलट, बाकी बची करीब 330 सीटें ऐसी रहीं जहां कांग्रेस को अपने दम पर पांच हजार से भी कम वोट मिले और कई जगहों पर तो प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई थी।
दूसरी ओर, बूथ स्तर के औसत की तुलना करें तो यदि एक विधानसभा क्षेत्र में औसतन 400 बूथ माने जाएं, तो कांग्रेस को दस हजार वोट वाली सीट पर हर बूथ पर औसतन 25 वोट मिलते दिखे। वहीं, इसके मुकाबले सपा को यदि एक विधानसभा में औसत 50 हजार वोट मिले हैं, तो हर बूथ पर उसे कम से कम 125 वोट हासिल हुए—जो कांग्रेस के मुकाबले काफी ज्यादा है।
किन सीटों पर मजबूत रही थी कांग्रेस
2022 के चुनाव में कांग्रेस को जिन 20 हजार से ज्यादा वोटों वाली 19 सीटों पर सफलता मिली थी, उनमें प्रमुख रूप से मथुरा की सदर, आगरा की खेरागढ़, हरदोई की बिलग्राम, रायबरेली की बछरावां व सरेनी, अमेठी की जगदीशपुर, गौरीगंज व तिलोई, कानपुर की किदवई नगर व गोविंदनगर, गोंडा की गौरा, कुशीनगर की तमकुहीराज, देवरिया की रुद्रपुर, वाराणसी की पिंडरा व कैंट, प्रयागराज की उत्तरी व कोराओं, बाराबंकी की जैदपुर और सिद्धार्थनगर की शोहरतगढ़ की सीट शामिल है। इसके विपरीत, कई जिले ऐसे भी रहे जहां कांग्रेस को किसी भी विधानसभा सीट पर पांच हजार वोट का आंकड़ा भी नसीब नहीं हुआ।
दोनों दलों के अपने-अपने सियासी तर्क
कांग्रेस के यूपी के कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद इमरान मसूद का तर्क है कि दलों को पुराना इतिहास देखने के बजाय वर्तमान जमीनी स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उनका दावा है कि कांग्रेस ने जमीन पर कड़ी मेहनत कर अपना आधार मजबूत किया है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यदि अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनना है तो उन्हें गठबंधन में सम्मानजनक सीटें (जैसे 150 या 170 के करीब) देनी होंगी।
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समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि पार्टी अभी शीर्ष स्तर की औपचारिक बैठकों का इंतजार कर रही है। सपा सूत्रों के मुताबिक, बयानबाजी से गठबंधन को नुकसान पहुंचता है। पार्टी का अंदरूनी रुख यह है कि वह कांग्रेस को 50 से 70 सीटों के बीच देने पर विचार कर सकती है, लेकिन यदि कांग्रेस इससे ज्यादा की मांग करती है, तो उसे अपनी जीत का आधार, उम्मीदवारों की क्षमता और जातिगत समीकरणों का ठोस खाका रखना होगा।
क्या गठबंधन कायम रहेगा
फिलहाल सपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के प्रमुख नेता इंडिया अलायंस के साथ बने रहने और मिलकर चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, बीच-बीच में आने वाले तीखे बयानों से कई बार असमंजस की स्थिति भी पैदा हो जाती है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि दोनों दलों का केंद्रीय नेतृत्व आपस में बैठकर सीट-बंटवारे के इस फॉर्मूले को कैसे सुलझाता है और कांग्रेस अपनी पसंद की कितनी सीटें पाने में सफल होती है।
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