Gonda News: पूर्व विधायक के बेटे शारदेन मोहन सिंह पर एक घंटे के भीतर दर्ज हुए दो मुकदमे
Gonda News: जिले के करनैलगंज क्षेत्र में पूर्व विधायक स्वर्गीय कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया के पुत्र शारदेन मोहन सिंह से जुड़े दो अलग-अलग आपराधिक मामलों ने स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 21 अक्टूबर को महज एक घंटे के भीतर दो अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की गईं। पहला मामला सरयू रेलवे क्रॉसिंग के पास मारपीट, जानलेवा हमले और हवाई फायरिंग से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला दशहरे के दौरान रामलीला मंच पर हंगामे और पुलिस से धक्का-मुक्की का है।
रेलवे क्रॉसिंग पर काफिले को लेकर विवाद और मारपीट का आरोप
एफआईआर के पहले मामले के मुताबिक, हरदोई जिले के कटका खुर्द निवासी दीपू सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है कि 16 अक्टूबर की रात करीब 9:15 बजे वह अपने साथियों अभय यादव और जीशान के साथ दुर्गा पूजा कार्यक्रम से लौट रहे थे। सरयू रेलवे क्रॉसिंग का फाटक बंद होने के कारण उनकी गाड़ी वहां रुकी हुई थी। इसी दौरान वहां 18-20 वाहनों का एक काफिला पहुंचा।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि काफिले में शामिल एक लैंड क्रूजर गाड़ी से शारदेन मोहन सिंह और अन्य लोग बाहर निकले। आरोप है कि करीब 35-40 लोगों ने दीपू सिंह को जबरन गाड़ी से खींचकर पीटा, उनके गले पर पैर रखकर जान से मारने की कोशिश की और बीच-बचाव करने आए लोगों को हथियार दिखाकर धमकाया। इसके अलावा, मौके पर हवाई फायरिंग किए जाने का गंभीर आरोप भी लगाया गया है।
दशहरे की रामलीला के मंच पर हंगामा और पुलिस से धक्का-मुक्की
दूसरा मामला 20 अक्टूबर को दशहरा मेला स्थल की घटना से संबंधित है। कस्बा चौकी प्रभारी सुमित कुमार सिंह की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, शारदेन मोहन के लगभग 40-50 समर्थक रामलीला मंच पर चढ़ने के लिए जिद करने लगे और वहां धक्का-मुक्की तथा गाली-गलौज शुरू कर दी।
पुलिसकर्मियों द्वारा समझाने और रोकने का प्रयास करने पर कथित तौर पर उनके साथ भी अभद्रता और धक्का-मुक्की की गई। पुलिस का कहना है कि इस हंगामे के कारण मेले में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई थी, जिससे वहां मौजूद महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने की आशंका उत्पन्न हो गई थी।
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दो एफआईआर से सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज
इन दोनों मुकदमों में गंभीर धाराओं का उल्लेख किया गया है। एक मामले में 35-40 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है, जबकि दूसरे मामले में शारदेन मोहन समेत करीब 50 अज्ञात समर्थकों का जिक्र है। पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच-पड़ताल कर रही है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि प्राथमिकी दर्ज होना किसी आरोप का अंतिम कानूनी प्रमाण नहीं होता है और इन मामलों में सत्यता की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगी।
क्षेत्रीय राजनीति में कभी बेहद प्रभावशाली रहे स्वर्गीय लल्ला भैया के परिवार से जुड़ा नाम एक ही दिन में दो मुकदमों में सामने आने के बाद से स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है। फिलहाल, सभी की निगाहें पुलिस की निष्पक्ष जांच और आगामी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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