कल्कि अवतार 2026: भगवान विष्णु के 10वें अवतार का जानिए कहां होगा जन्मस्थान

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Shri Kalki Dham: लेकर श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था है। मान्यताओं के अनुसार, कलियुग के अंत में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान कल्कि संभल के एक तपस्वी ब्राह्मण परिवार में अवतार लेंगे। आज ‘कलियुग दिवस’ (आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि) के अवसर पर, आइए जानते हैं भगवान कल्कि के जन्मस्थान, उनके स्वरूप, आयु और उत्तर प्रदेश के संभल में बन रहे ऐतिहासिक श्री कल्कि धाम से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण बातें।

श्रीमद्भागवत पुराण और कल्कि पुराण के अनुसार, भगवान कल्कि का जन्म गंगा और रामगंगा नदियों के मध्य स्थित ‘शंभल’ (संभल) में होगा। धर्माचार्यों ने इस पावन स्थान की पहचान उत्तर प्रदेश के संभल जिले के असमोली विकास खंड स्थित ‘ऐंचोड़ा कंबोह’ गांव के रूप में की है। यह स्थान संभल मुख्य शहर से लगभग 16 किलोमीटर और देश की राजधानी दिल्ली से करीब 160 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

अनोखा श्री कल्कि धाम

ऐंचोड़ा कंबोह गांव में भव्य ‘श्री कल्कि धाम’ का निर्माण कार्य चल रहा है। इस धाम की दो सबसे बड़ी विशेषताएं हैं—पहला, यह विश्व का ऐसा इकलौता मंदिर है जो भगवान के उस अवतार के लिए बन रहा है जिसने अभी तक जन्म ही नहीं लिया है। दूसरा, इसका निर्माण ठीक उसी भू-भाग पर किया जा रहा है जिसे शास्त्रों में अवतार की जन्मस्थली बताया गया है।

तपस्वी ब्राह्मण परिवार में होगा जन्म

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कल्कि का प्राकट्य संभल के एक अत्यंत धार्मिक व तपस्वी ब्राह्मण परिवार में होगा। उनके पिता का नाम विष्णुयश और माता का नाम सुमति होगा। वे पृथ्वी पर सत्य और धर्म की पुनरुत्थान यात्रा का नेतृत्व करेंगे।

जानिए कलियुग का समय चक्र

शास्त्रों और भविष्यमालिका पुराण के अनुसार, कल्कि अवतार कलियुग और सतयुग के संधिकाल (कलियुग के अंतिम चरण) में होगा। पौराणिक काल-गणना के अनुसार कलियुग की कुल अवधि 4,32,000 वर्ष है, जिसमें से अभी केवल लगभग 5,000 वर्ष ही व्यतीत हुए हैं। इस गणना के अनुसार, अवतार के समय में अभी करीब 4,26,000 वर्षों से अधिक का समय शेष है।

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भगवान का दिव्य स्वरूप, विवाह और लीला अवधि

पुराणों में भगवान के स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया गया है कि वे अत्यंत तेजस्वी, बलिष्ठ और दिव्य कांति वाले होंगे। वे ‘देवदत्त’ नामक सफेद घोड़े पर सवार होकर हाथ में जगमगाती दिव्य तलवार धारण करेंगे। भविष्य मालिका के अनुसार, वे लगभग 23 वर्षों तक अपनी लीलाएं दिखाएंगे (कुछ ग्रंथों में 100 वर्ष की आयु का भी उल्लेख है) और अधर्मियों का संहार करेंगे। उनका विवाह सिंहल द्वीप के राजा की पुत्री राजकुमारी पद्मा से होगा, जिन्हें देवी लक्ष्मी का अवतार माना गया है।

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