कांग्रेस ने फिर अपनाई बांटो और राज करो की नीति

वर्तमान समय में कांग्रेस पार्टी जहां एक ओर अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए चुनाव आयोग व देश की अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर हमलावर है, वहीं दूसरी ओर उसके तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हिंदू देवी-देवताओें का विभाजन करके कांग्रेस की बांटो और राज करो की नीति को आगे बढ़ाकर राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। दक्षिण का राज्य तेलंगाना कांग्रेस के शासन में आर्थिक तंगी व भ्रष्टाचार से गुजर रहा है। अपनी प्रशासनिक नाकामियों तथा चुनावी वादों को पूरा करने में नाकाम रहने व मुस्लिम तुष्टिकरण को छुपाने के लिए रेवंत रेड्डी ने प्रभु श्रीराम को उत्तर और भगवान शिव को दक्षिण का देवता बताकर एक नयी विभाजक रेखा खींचने का असफल प्रयास किया है। उत्तर भारत में अपने अस्तित्व का संघर्ष करती कांग्रेस अब विभाजनकारी मानसिकता के सबसे निचले पायदान पर पहुँच गयी लगती है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी इससे पूर्व भी कई विवादित बयान दे चुके हैं। एक बार उन्होंने कहा था कि मुस्लिम ही कांग्रेस है और कांग्रेस ही मुस्लिम है। रेवंत रेड्डी का कहना है कि भगवान राम अमीरों के देवता हैं और भगवान शिव गरीबों के देवता हैं। वे स्वयं को भगवान शिव का भक्त बताते हुए कहते हैं कि भाजपा ने भगवान राम को चोरी कर लिया है। रेवंत रेड्डी का कहना है भाजपा के लोग हर हर महादेव तक नहीं बोलते। वह एक बार हिंदुओं के 33 करोड़ देवताओं पर भी विकृत बयानबाजी कर चुके हैं। दिमागी नक्सली नेताओं का यही लक्ष्य रहता है किसी न किसी प्रकर हिंदू देवी देवताओं का अपमान किया जाए। विगत सितम्बर में हुए गणेशोत्सव आयोजन के दौरान तेलंगाना में कई जगह से गणेशेत्सवों के आयोजन पर बाधाओं के समाचार आ रहे थे।
कांग्रेस पार्टी ने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण में और वाराणसी में काशी विश्वनाथ कारिडोर का विरोध किया। ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग को फव्वारा बताने में सबसे पहले कांग्रेस ही मैदान में उतर पड़ी थी। रेवंत रेड्डी संभवतः यह बात भूल गए कि भगवान शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने समाज की रक्षा के लिए विष को भी अपने गले में ही धारण कर लिया था। तेलंगाना के मुख्यमंत्री को भगवान श्रीराम का चरित्र पढ़ना चहिए। मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरषोत्तम थे। अंग्रेजों की बनाई हुई पार्टी कांग्रेस ने अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की रणनीति के तहत ही विगत 76 वर्षों में हिंदू समाज को जाति, पंथ, संप्रदाय, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांटने की पूरी कोशिश की है और वह लगातार जारी है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अपने बयान के माध्यम से आर्य बनाम द्रविड का विभाजन करते हुए यह भी कहा कि हम द्रविड़ हैं और हम भगवान शिव की आराधना करते हैं जबकि आर्य प्रभु श्रीराम को मानते हैं।
रेवंत रेड्डी का कहना है कि बीजेपी के मंचों से जय श्रीराम का नारा सुनाई देता है जबकि हर हर महादेव का उद्घोष नहीं किया जाता। रेड्डी ने कहा कि “मोदीजी हर हर महादेव क्यों नहीं कहते?“ रेवंत रेड्डी का बयान झूठ का पुलिंदा भर है। रेवंत रेड्डी को यह नहीं पता कि उत्तर भारत में केदारनाथ, विश्वनाथ और महाकाल जैसे ज्योतिर्लिंग हैं, उत्तर भारत में ही काँवड़ यात्रा होती है और श्रावण माह महादेव को ही समर्पित रहता है।
कांग्रेस को तो भगवान शिव के मंदिरों के विकास से भी चिढ़ रही है। गुजरात के पवित्र सेामनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार रोकने और तत्कालीन राष्ट्रपति स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद को सोमनाथ मंदिर न जाने देने का भरसक प्रयास स्वयं नेहरु ने किया था। सोमनाथ मंदिर के 1000 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कर्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रतिभाग पर भी कांग्रेस ने नफरत भरा बयान दिया था। मध्य प्रदेश के उज्जैन में बने भव्य महाकाल कॉरिडोर का विरोध भी कांग्रेस नेताओं ने ही किया था।
आज दक्षिण भारत के जो कांग्रेसी नेता अपने आपको शिवभक्त बता रहे हैं वह ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग के उद्धार के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे हैं? कांग्रेस के शासनकाल में भगवान शिव के मंदिरों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को एक बार काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर में जाकर दर्शन करना चाहिए तब उन्हें स्पष्ट रूप से पता चल जाएगा कि आर्य प्रभु श्रीराम के भी भक्त हैं और भगवान शिव के भी भक्त हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रामेश्वरम में भी भगवान की पूजा करते हैं और काशी विश्वनाथ धाम में भी। वह अपनी हर जनसभा में हर- हर महादेव के नारे लगाते हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवत रेड्डी ने निहित राजनीतिक स्वार्थ व गांधी परिवार की चाटुकारिता के लिए एक निंदनीय बयान दिया है।
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यह बयान भारत को उत्तर और दक्षिण में बांटने की कांग्रेस की राजनीति का हिस्सा है। भाषा के आधार पर भी कांग्रेस उत्तर और दक्षिण को लड़ाती रही है। इस बयानबाजी का एक पक्ष मुस्लिम समाज को खुश रखने के लिए हिन्दुओं की आस्था पर प्रहार करना भी है। यहां पर एक बड़ा सवाल यह भी है कि कांग्रेस के नेता कभी अन्य धर्मों के प्रति इस प्रकार के बयान क्यों नहीं देते? यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो चुकी है गांधी परिवार व विपक्ष को अयोध्या का भव्य राम मंदिर व काशी विश्वनाथ धाम सहित अन्य मंदिरों का विकास अच्छा नहीं लग रहा है, इसलिए अब उसने यह नया नैरेटिव गढ़ना शुरू कर दिया है कि प्रधानमंत्री मोदी व बीजेपी के लोग हर- हर महादेव नहीं बोलते।
वास्तविकता ये है देश की जनता कांग्रेस की इस फूट डालो-राज करो की नीति अच्छी तरह से समझ चुकी है यही कारण है कि कांग्रेस लगातार सिमट रही है, लेकिन वह अपने में सुधार के बजाए चुनाव आयोग व संवैधानिक संस्थाओं पर हमलावर होकर सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही है।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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