आराधना मिश्रा ‘मोना’ के हाथ यूपी कांग्रेस की कमान, राजनीति से दूर रहकर जानें क्या करते हैं उनके पति
UP Politics: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में संगठन को नई धार देने के लिए रामपुर खास से लगातार विधायक चुनी जा रहीं वरिष्ठ नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। दिग्गज कांग्रेस नेता और वर्तमान राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की सुपुत्री आराधना मिश्रा का परिवार दशकों से प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहा है। हालांकि, इस चर्चित सियासी घराने से इतर एक और प्रभावशाली व्यक्तित्व है, जो मुख्यधारा की राजनीति की चकाचौंध से दूर रहकर परिवार और अपने व्यवसाय को मजबूती दे रहा है, वे हैं उनके पति अंबिका मिश्र।
बिजनेस वर्ल्ड में 27 साल का अनुभव
अंबिका मिश्र कोई साधारण नाम नहीं हैं, वह लखनऊ के प्रमुख शिक्षण संस्थान अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के चेयरमैन हैं। कॉर्पोरेट एवं व्यावसायिक जगत में लगभग 27 वर्षों के लंबे अनुभव के साथ उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग, कंस्ट्रक्शन और एजुकेशन जैसे विविध क्षेत्रों में सफल व्यावसायिक समूहों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के तौर पर काम किया है।
VIDEO | Lucknow: Newly appointed Uttar Pradesh Congress president Aradhana Mishra 'Mona' says, "First of all, I would like to express my gratitude to my top leadership, who has given me this big responsibility. My family has a four-generation legacy in the Congress party, and I… pic.twitter.com/n3SP4G2jnw
— Press Trust of India (@PTI_News) October 3, 2026
संस्थान के अनुसार, अंबिका मिश्र कुशल रणनीतिकार के रूप में आंतरिक और बाहरी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हैं। वह उच्च स्तर पर क्लाइंट रिलेशनशिप संभालने के साथ-साथ बिजनेस ग्रोथ के लिए दीर्घकालिक योजनाओं को आकार देते हैं। उनका मुख्य फोकस तकनीकी और व्यावहारिक शिक्षा के माध्यम से संस्थान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर रहता है। पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो अंबिका और आराधना मिश्रा के दो बच्चे राघव और नंदजा हैं, जो कभी-कभार राजनीतिक रैलियों व अभियानों में नज़र आ जाते हैं।
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वहीं आराधना मिश्रा खुद पिछले दो दशकों से सक्रिय राजनीति में हैं। रामपुर खास विधानसभा सीट पर उनके परिवार का दबदबा बीते 50 सालों से कायम है। प्रमोद तिवारी 1980 में पहली बार यहाँ से विधायक बने थे और लगातार 9 बार चुने गए। इसके बाद उनकी सियासी विरासत को संभालते हुए आराधना मिश्रा ने अपने पहले ही चुनाव में 67,679 वोटों की ऐतिहासिक बढ़त से जीत हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा। 2022 के कड़े मुकाबले में उन्होंने भाजपा प्रत्याशी नागेश प्रताप सिंह को 14,741 मतों से पराजित किया था।
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