इस्राइल के हवाई यात्रियों और भारतीय पायलट को सैल्यूट है

उम्मीद से परे, कॉमनसेंस का अतुलनीय उदाहरण, वीरता की बेमिसाल कहानी, 9/11 जैसी लोमहर्षक, संहारक, खतरनाक और मानवता का खून करने जैसी मानसिकता पर नियंत्रण स्थापित करना कोई आम बता तो हो नहीं सकती है। यह बहुत बड़ी बात है और अहिंसक, कानून शील दुनिया के लिए एक अनमोल सीख है। सिर्फ इस्राइल की यात्रियों की नहीं बल्कि भारतीय पायलट स्मित की वीरता भी प्रेरक है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मित की प्रशंसा करते हुए उसे महान हीरो घोषित किया है। एक हवाई यात्री का कर्तव्य क्या होना चाहिए, उसकी वीरता कैसी होनी चाहिए, यह सब स्थापित हुआ है।
यात्री जागरूक हैं, उनका कॉमनसेंस भी खतरे को टालने वाला है, खतरे से लड़ने वाला है तो फिर हम जिहादी, हिंसक और मानवता विरोधी शक्तियों को पाठ पढ़ा सकते हैं। इतना ही नहीं बल्कि हवाई जहाजों के अपहरण को रोक सकते हैं। हवाई यात्रियों की जान की भी रक्षा हो सकती है। दुनिया में अपराधियों ने, हिंसकों ने, आतंकी संगठनों ने, विखंडनकारियों ने और असफल देशों ने हवाई जहाजों का अपहरण कर अपनी मांगों को मनवाने और ब्लैकमेल करने, सौदेबाजी करने, पैसे वसूलने या फिर अपने हिंसक, आतंकी को छुड़ाने के लिए ऐसी प्रवृत्तियाँ स्थापित करते हैँ।
दुनियां में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, इसके पीछे कमजोर और उदासीन सुरक्षा व्यवस्था जिम्मेदार रही हैं, खासकर कमजोर देश और आधुनिक टेक्नोलॉजी में कमजोर देश अपने हवाई अड्डों और हवाई क्षेत्र को सुरक्षित रखने में सक्षम नहीं होते, जिस कारण ऐसी लोमहर्षक, खतरनाक, हिंसक और जानलेवा घटना घटती है। इस घटना में भी ऐसी ही कमजोरियां सामने आई हैं। एक पायलट जो जिहादी और मानसिकता और मजहबी पागलपन का सहचर था, जिस पर मजहबी हिंसा सिर चढ़कर बोल रही थी, वह कैसे सऊदी अरबिया एयर लाइंस में पायलट की नौकरी कर रहा था?
वह पायलट चाकू लेकर हवाई जहाज पर चढ़ने में कैसे कामयाब हो गया? आत्मघाती साजिश की अनिवार्य कड़ियाँ भी जांच एजेंसियां खोज सकती हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, जब बाड़ ही खेत खाने लगे, जब पायलट ही जहाज अपहरण कर मानव आबादी के बीच टकरा कर निर्दोष लोगों की जिन्दगी का संहार करने लगे तो फिर शांति, कानूनशील जिंदगी जीने वाली दुनियां के सामने कैसी हिंसक चुनौती खड़ी होगी जो कल्पना से भी परे होगी।
सिर्फ इस्राइल के हवाई यात्रियों की ही नहीं बल्कि इस्राइल की सेना, इस्राइल की सरकार, इस्राइल की सुरक्षा एजेंसियों ने भी गजब का साहस दिखाया, अपनी वीरता दिखाई, अपना सैन्यकुशलता और दक्षता का भी प्रदर्शन किया। इस्राइल की सरकार ने किसी से मदद नहीं मांगी, अरब देशों के सामने झुकने का काम नहीं किया, बल्कि स्वयं की सैन्य शक्ति से अपहरणकर्ता से लड़ने और जहाज को मुक्त कराने की नीति को अंजाम दिया। जैसे ही पायलट ने अपहरण का सिंगल भेजा वैसे ही इस्राइल की सभी सैन्य शक्तियां एक्टिव हो गईं।
राष्ट्रीय संकट का सायरन बज गया, भीषण खतरे का एलट जारी हो गया। फाइटर जहाज, कमांडो के साथ उड़ गए। मिनटों में फाइटर जहाज उक्त जहाज को घेरे में ले लिया। फाइटर जहाज किसी अनहोनी को रोकने के लिए पूरी तरह से एक्टिव थे। फाइटर जहाजों की गर्जना हवाई यात्रियों के साहस को सैल्यूट मार रही थी। सऊदी अरब के हवाई क्षेत्र के हवाई अड्डे पर उक्त जहाज की लैडिंग कराई। किसी अन्य खतरे को टालने के लिए इस्राइल का फाइटर जहाज तैनात थे। क्योंकि आतंकी संगठनों का प्लान बी भी एक्टिव होता है। इस प्रकार अपने ऊपर आए इस आतंकी खतरे को इस्राइल ने नियंत्रित कर आतंकी मानसिकता को कड़ा संदेश दे दिया।
इस्राइल के राष्ट्रपति बैंजामिन नेतन्याहू की गर्जना भी दुनिया ने एक बार फिर सुनी। कुछ दिन पूर्व ही नेतन्याहू की गर्जना संयुक्त राष्ट्र संघ में दुनियां ने सुनी थी। नेतनयाहू ने उनके भाषण का बहिष्कार करने वाले देशों को कायर कहा था और आतंक का समर्थक भी कहा था। उसने साफ कहा था कि हमास और हिज्बुल्लाह का समर्थन करने वालों को छोड़ेंगे नहीं। इसी प्रकार नेतन्याहू ने इस घटना को आतंक की घटना बताई है, साजिश बताई है। हमास और हिज्बुल्लाह का नाम भी लिया है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि उसने यह भी कह डाला कि साजिश रचने वालों पर हमारी मिसाइलें गरजेगी। हम साजिश कर्त्ताओं को दण्ड जरूर देंगे। अगर हाथ ईरान का पाया गया तो फिर ईरान पर इस्राइल का भीषण हमला होगा। ऐसे ओमन पर इस्राइल की मिसाइलें गरज सकती हैं, क्योंकि अपहरण करने का प्रयास करने वाला पायलट ओमन का नागरिक है।
ओमन के साथ इस्राइल का कोई राजनयिक संबंध नहीं है, फिलिस्तीन को लेकर राजनयिक तकरार है, गतिरोध है। लेकिन इस्राइल की गुप्तचर एजेंसी मोसाद की शक्ति और उसकी गुप्तचरी हिंसा को कौन नहीं जानता है? दुनियां की सबसे खतरनाक और हिंसक गुप्तचर एजेंसी है मोसाद। मोसाद साजिशकर्त्ताओं को पताल से भी निकाल कर मार देगी। अपने शत्रुओं को जीवित नहीं छोड़ने का जनून ही इस्राइल को खास शक्ति बनाता है।
थोड़ी देर के लिए हम गणित की भाषा में यह मान लेते हैं कि जिहादी, हिंसक पायलट अपने लक्ष्य में सफलता हासिल कर लेता तो फिर इसका दुष्परिणाम कितना भयानक होता, कितना हिंसक होता, कितना त्रासदीपूर्ण होता, कितना डरावना होता, कितनी जान लेने वाला होता? मजहबी, हमास, हिज्बुल्लाह, अलकायदा, बोका हरम जैसी आतंकी मानसिकता कैसी होती है, यह कहने की आवश्यकता नहीं है। हमास ने इस्राइल पर हमला कर गर्भवती महिलाओं के पेट से बच्चे निकाल कर, उसके मांस का भंजन किया था। सबसे खास बात यह है कि आतंकी के निशाने पर कौन सी जगह होती? आतंकी के निशाने पर इस्राइल ही था, क्योंकि वह इस्राइल विरोधी मानसिकता से ग्रसित था और उस पर इस्राइल के लोगों का संहार करने का भूत नाच रहा था। 9/11 जैसी करवाई करना चाहता था।
नेतनयाहू ने कहा भी है कि वह पायलट 9/11 जैसी करवाई और हिंसा ही करना चाहता था। जाहिर तौर पर उस पायलट के निशाने पर इस्राइल के सैनिक अड्डे, इस्राइल की सेना भवन, इस्राइल के आन, बान, शान के प्रतीक चिह्नों, यरूशलम स्थित यहूदी पूजा स्थलों के साथ ही साथ इस्राइल की अति भीड़ वाले क्षेत्र ही होता। फिर बड़ी संख्या में जान की हानि होती। ऐसी मानसिकता बड़ी क्षति चाहती हैं, बड़ी संख्या में निर्दोष की जान लेना चाहती है। इसका कोई एक उदाहरण नहीं है बल्कि कई उदाहरण है। इस्राइल में हमास का हमला, जिसमें तीन हजार लोगों की जान लिया था। 9/11 का हमला, जिसमें अमेरिका की समृद्धि और वैभव के प्रतीक वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का विध्वंस हुआ था और पांच हजार से भी अधिक लोगों की जान गई थी। मुंबई में पाकिस्तान की आतंकी संगठनों ने मानव जीवन का लोमहर्षक संहार किया था।
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कोई देश महान कैसे बनता है? इस्राइल जैसा देश सामरिक शक्ति के रूप में कैसे स्थापित होता है, मजहबी मानसिकता से ग्रसित और पागलपन के शिकार लोगों की हिंसा रोकने और प्रतिहिंसा का शिकार बनाने में सफलता कैसे प्राप्त करता है? नागरिको की जागरूकता, नागरिकों की दक्षता, नागरिकों की समृद्धि, नागरिकों के संकट के समय धीरज रखने और प्रतिकार करने की शक्ति, अपने देश को महान बनाने के लिए परिबद्धता, अपने देश से प्यार करने के साथ ही साथ जान न्योछावर करने की शक्ति ही किसी देश को महान बनाता है। इस्राइल के पास ये सभी विशेषताएं उपस्थित हैं। इस्राइल के नागरिक खुशी-खुशी सैनिक ट्रेनिंग लेते हैं और सैनिक नहीं होते हुए भी संकट और विदेशी हमले के दौरान सैनिक बन जाते हैं और अपनी सेना की ओर से युद्ध लड़ते हैं। यही कारण है कि इस्राइल अपने दुश्मनों का शिकार बनाने में सफलता हासिल करता है।
दुर्भाग्य से मजहबी आतंक के खिलाफ वैश्विक अभियान दम तोड़ दिया। अमेरिका पीछे हट गया, ब्रिटेन अलग हो गया, नाटो की एकता टूट गई, नाटो अपने ही अंतर्विरोधों का शिकार हो गया। आतंकी देश पाकिस्तान अमेरिका का दोस्त बन गया। ऐसी स्थिति में मजहबी आतंकी मानसिकता फिर से खतरनाक रूप से सक्रिय हो गई और संहारक भी बन गई हैं। ऐसी आतंकी मानसिकताएं न सिर्फ़ इस्राइल के दुश्मन हैं बल्कि सभी गैर मुस्लिम देशों के भी दुश्मन हैं। ऐसी मानसिकताओं का दमन और संहार भी अनिवार्य है। नहीं तो फिर मानव खून का संहार होता रहेगा।
(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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