टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के बीच फिर छिड़ा पावर वॉर, जानिए टाटा साम्राज्य की जटिल कॉर्पोरेट संरचना और चयन प्रक्रिया
Tata Group News: टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व को लेकर एक बार फिर बड़ा कॉर्पोरेट विवाद खड़ा हो गया है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन द्वारा 12 अगस्त को इस्तीफे के ऐलान के लगभग 35 दिन बाद, गुरुवार को टाटा संस के बोर्ड ने उनके पुनर्नियुक्ति (Re-appointment) का प्रस्ताव पास कर दिया। हालांकि, इस प्रस्ताव के पारित होने के तुरंत बाद टाटा ट्रस्ट्स ने इसे खारिज करते हुए चंद्रशेखरन का तीसरा कार्यकाल गैर-कानूनी करार दे दिया है।
बोर्ड रूम में क्या-क्या हुआ
टाटा संस की बैठक: टाटा संस के बोर्ड की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा भी शामिल थे। बोर्ड के 4 निदेशकों ने चंद्रशेखरन को 2027 के बाद 5 साल का तीसरा कार्यकाल देने के प्रस्ताव का समर्थन किया। नोएल टाटा ने इसका कड़ा विरोध किया, लेकिन बहुमत के बल पर प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
टाटा ट्रस्ट्स का पलटवार: बैठक के कुछ ही देर बाद टाटा ट्रस्ट्स ने आधिकारिक बयान जारी कर इस फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (Articles of Association) के नियमों के तहत यह निर्णय पूरी तरह से अवैध है।
टाटा ट्रस्ट्स ने किस फैसले को बताया गैर-कानूनी
टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, टाटा संस का बोर्ड चेयरमैन की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति पर तब तक कोई वैध बैठक या प्रस्ताव पास नहीं कर सकता, जब तक टाटा ट्रस्ट के दोनों नॉमिनी डायरेक्टर्स (नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन) मौजूद न हों और दोनों की सहमति न हो।
इसके अलावा, टाटा संस के संविधान के आर्टिकल 121A के तहत बोर्ड में किसी भी बड़े बदलाव या रि-अपॉइंटमेंट से पहले टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टियों से पूर्व-सलाह और औपचारिक मंजूरी लेना अनिवार्य है। बैठक में दोनों में से किसी एक भी नॉमिनी डायरेक्टर का विरोध या वीटो (Veto) प्रस्ताव को तुरंत निष्प्रभावी कर देता है।

टाटा साम्राज्य में असली पावर किसके पास
भारत के कॉर्पोरेट जगत में टाटा समूह का पावर बैलेंस काफी अनूठा है, जिसमें टाटा ट्रस्ट्स सर्वोपरि भूमिका निभाता है।
टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts): यह सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) और सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) सहित कई ट्रस्टों का समूह है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की कुल 66% हिस्सेदारी है (52% हिस्सेदारी SRTT और SDTT की तथा 14% अन्य ट्रस्टों की)। समूह के सभी नीतिगत फैसलों पर ट्रस्ट्स का अंतिम नियंत्रण होता है।
टाटा संस (Tata Sons): 1904 में जमशेदजी टाटा के निधन के बाद अस्तित्व में आई यह टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी है, जिसकी विभिन्न टाटा कंपनियों में 25% से लेकर 73% तक हिस्सेदारी है।
इसे भी पढ़ें: निठारी कांड में बरी होने के बाद जी रहा था गुमनाम जिंदगी
कैसे चुना जाता है टाटा संस का चेयरमैन
टाटा संस के चेयरमैन के चुनाव के लिए 5 सदस्यीय सिलेक्शन कमेटी का गठन किया जाता है। इसमें से 3 सदस्य सीधे टाटा ट्रस्ट्स द्वारा मनोनीत किए जाते हैं, 1 सदस्य टाटा संस के बोर्ड से होता है और 1 बाहरी स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल होता है।
2027 में समाप्त हो रहा है चंद्रशेखरन का कार्यकाल
1987 में टाटा ग्रुप (TCS) से करियर की शुरुआत करने वाले एन. चंद्रशेखरन 2009 में TCS के CEO बने थे। इसके बाद 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया। 2022 में उन्हें 5 साल का दूसरा कार्यकाल मिला, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है। यद्यपि चंद्रशेखरन 12 अगस्त को पद छोड़ने का मन बना चुके हैं, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स की अंतिम मंजूरी के बिना उनकी पुनर्नियुक्ति का कोई भी प्रस्ताव कानूनी रूप से लागू नहीं हो सकता।
इसे भी पढ़ें: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बजा भारत की कूटनीति का डंका
