लाल सागर के रणनीतिक द्वीपों पर हूती विद्रोहियों का कब्जा, जानें कौन हैं यमन के अंसार अल्लाह
Houthi Rebels: यमन में सक्रिय ईरान समर्थित हूती विद्रोही गुट ने दक्षिणी लाल सागर में स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण कई द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया है। इस नए घटनाक्रम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के प्रमुख जलमार्ग अल-मंदेब स्ट्रेट पर हूतियों की पकड़ और ज्यादा मजबूत हो गई है। यह समुद्री मार्ग स्वेज नहर के माध्यम से यूरोप और सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाहों को हिंद महासागर व समूचे एशिया से जोड़ता है। हालांकि हूतियों का कहना है कि वे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन उन्होंने सऊदी अरब के जहाजों पर हमले जारी रखने का ऐलान किया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं।
कौन हैं यमन के अंसार अल्लाह यानी हूती विद्रोही
हूती मुख्य रूप से यमन के अल्पसंख्यक शिया ‘जैदी’ समुदाय से ताल्लुक रखने वाला एक सशस्त्र संगठन है, जिसे ईरान का सीधा समर्थन प्राप्त है। इस गुट का गठन 1990 के दशक में हुसैन अल-हूती ने तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के शासन में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ किया था, और उन्हीं के नाम पर इस समूह को ‘हूती’ कहा जाने लगा। खुद को अंसार अल्लाह (ईश्वर के साथी) कहने वाला यह संगठन यमन के घनी आबादी वाले उत्तर-पश्चिमी इलाके पर नियंत्रण रखता है। गाजा पर इजरायली हमलों के बाद लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाकर हूती वैश्विक चर्चा के केंद्र में आए थे। यह संगठन ईरान के नेतृत्व वाले ‘प्रतिरोध की धुरी’ (Axis of Resistance) का अहम हिस्सा है।

लेबनान के हिज्बुल्लाह से प्रेरणा और 2014 से संघर्ष
हूती विद्रोहियों को रणनीतिक प्रेरणा और ट्रेनिंग मुख्य रूप से लेबनान के शिया संगठन हिज्बुल्लाह से मिलती है। वर्ष 2014 में हूतियों ने यमन की सत्ताधारी सरकार को उखाड़ फेंका और राजधानी सना पर अपना अधिकार जमा लिया। अपने पड़ोसी देश में शिया प्रभाव और अपनी सीमा पर सुरक्षा खतरे को देखते हुए सऊदी अरब ने 2015 में हूतियों के खिलाफ सैन्य गठबंधन बनाकर हस्तक्षेप किया था। तब से हूती और सऊदी अरब के बीच भीषण युद्ध जारी है। हूती लगातार सऊदी अरब के शहरों और महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाते आ रहे हैं।
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सऊदी तेल पाइपलाइन पर हमला और हवाई जवाबी कार्रवाई
हाल ही में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की करीब 1200 किलोमीटर लंबी मुख्य तेल पाइपलाइन पर बड़ा हमला बोला है, जो प्रतिदिन 50 लाख बैरल तेल का परिवहन करती है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब को होर्मुज स्ट्रेट को बायपास कर सीधे यानबू बंदरगाह तक तेल पहुंचाने की सुविधा देती है। इस हमले के जवाब में सऊदी अरब ने यमन में 50 से अधिक भीषण हवाई हमले किए हैं। ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावित होने और अब लाल सागर में इस नए संकट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भारी दबाव बन गया है, जिसके चलते जुलाई के बाद पहली बार कच्चे तेल का दाम फिर से उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
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