महिलाओं की आजादी पर तालिबानी ताला, अकेले सफर करने पर गिरफ्तारी का खतरा
काबुल: दुनिया भर में जहां महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं अफगानिस्तान में स्थिति बिल्कुल विपरीत है। अगस्त 2021 में सत्ता में आने के बाद से तालिबान ने महिलाओं की आवाजाही, शिक्षा और रोजगार पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। तालिबान सरकार के नियमों के अनुसार, देश में कोई भी महिला बिना किसी पुरुष साथी (पति, पिता, भाई या गाइड) के लंबी दूरी की यात्रा नहीं कर सकती। नियमों का उल्लंघन करने पर महिलाओं को हिरासत में लेने और सजा देने का प्रावधान है।
72 किलोमीटर का दायरा और वाहनों के लिए दिशा-निर्देश
तालिबान के नैतिकता प्रसार और व्यसन रोकथाम मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, महिलाएं 72 किलोमीटर से अधिक दूरी की यात्रा अकेले तय नहीं कर सकतीं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि लंबी यात्रा के दौरान महिला के साथ किसी पुरुष रिश्तेदार का होना अनिवार्य है। इसके अलावा, सार्वजनिक वाहनों के चालकों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी महिला का सिर ढका न हो (हिजाब न पहना हो), तो उसे सवारी न दें।

पार्क और जिम जाने पर भी पाबंदी
महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करने वाले ये नियम केवल यात्रा तक सीमित नहीं हैं। अफगानिस्तान में महिलाओं के अकेले पार्क, सार्वजनिक पार्कों और जिम में जाने पर भी पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। तालिबान का कहना है कि ये कदम इस्लामी नियमों और स्थानीय परंपराओं का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं।
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शिक्षा और रोजगार से भी बेदखल
अफगानिस्तान विश्व का एकमात्र ऐसा देश बन गया है जहां लड़कियों को छठी कक्षा के बाद औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं है। मार्च 2022 में सेकेंडरी स्कूलों को लड़कियों के लिए बंद कर दिया गया था, जिसके बाद दिसंबर 2022 में उच्च शिक्षा (यूनिवर्सिटी) पर भी रोक लगा दी गई। युनेस्को (UNESCO) के आंकड़ों के अनुसार, करीब 24 लाख लड़कियां शिक्षा से वंचित हैं। इसके साथ ही महिलाओं के काम करने और नौकरी करने पर भी कड़े प्रतिबंध लागू हैं।
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