भारत का पहला गांव माणा की पौराणिक कथाएं, दर्शनीय स्थल और यात्रा गाइड

First Village of India

First Village of India: उत्तरखंड के चमोली जिले में समुद्र तल से 10,500 फीट की ऊंचाई पर बसा माणा गांव केवल भारत की सरहद का प्रहरी ही नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति का एक जीवित दस्तावेज है। बद्रीनाथ धाम से मात्र 3 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव को पहले भारत का आखिरी गांव कहा जाता था, लेकिन अब इसे आधिकारिक तौर पर भारत का पहला गांव माना जाता है।

यह गांव पौराणिक रहस्यों, अद्भुत धार्मिक मान्यताओं और प्राकृतिक सुंदरता का अनोखा संगम है। हालांकि, कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी के कारण यह गांव साल में 6 महीने के लिए पूरी तरह वीरान हो जाता है।

माणा गांव से जुड़ी पौराणिक कथाएं और मान्यताएं

व्यास गुफा और गणेश गुफा: मान्यता है कि इसी स्थान पर स्थित गुफा में बैठकर महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों का वर्गीकरण किया, 18 पुराण लिखे और महाभारत की रचना की। भगवान गणेश ने बिना रुके व्यास जी की वाणी को लिपिबद्ध किया था। व्यास गुफा की शिलाएं आज भी एक के ऊपर एक रखी पुस्तकों के पन्नों जैसी दिखाई देती हैं।

First Village of India

गणेश जी का सरस्वती को श्राप: जब भगवान गणेश महाभारत लिख रहे थे, तब सरस्वती नदी के प्रचंड वेग का शोर विघ्न डाल रहा था। गणेश जी के आग्रह के बाद भी जब नदी शांत नहीं हुई, तो उन्होंने सरस्वती को श्राप दिया कि वे इस स्थान के बाद विलुप्त हो जाएंगी। यही कारण है कि ‘केशव प्रयाग’ (अलकनंदा और सरस्वती का संगम) के बाद सरस्वती नदी अदृश्य हो जाती है। पूरे भारत में सरस्वती के साक्षात दर्शन केवल माणा में होते हैं।

भीम पुल और स्वर्गारोहण पथ: महाभारत युद्ध के बाद जब पांडव द्रौपदी संग स्वर्ग की ओर बढ़ रहे थे, तो उफनती सरस्वती नदी को पार करने के लिए महाबली भीम ने एक विशाल शिला उठाकर नदी पर रख दी थी, जिसे आज ‘भीम पुल’ कहा जाता है। यही रास्ता स्वर्गारोहण की ओर जाता है।

चमत्कारी वसुधारा झरना: भीम पुल से 5 किलोमीटर आगे 400 फीट की ऊंचाई से गिरता वसुधारा झरना स्थित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसका दूधिया जल केवल उन्हीं लोगों पर गिरता है जिनका मन पवित्र और निष्पाप हो।

6 महीने वीरान हो जाता है गांव

माणा का प्राचीन नाम मणिभद्रपुर था। यहां मुख्य रूप से भोटिया जनजाति के लगभग 60 परिवार रहते हैं। नवंबर से अप्रैल तक अत्यधिक बर्फबारी और माइनस तापमान के कारण जीवन ठप हो जाता है। इस दौरान ग्रामीण अपने घरों पर ताला लगाकर निचले इलाकों जैसे जोशीमठ, गोपेश्वर और चमोली में चले जाते हैं।

बद्रीनाथ धाम से जुड़ाव: जैसे ही शीतकाल में भगवान बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होते हैं, माणा गांव भी खामोश हो जाता है। वसंत ऋतु में कपाट खुलने के साथ ही यहां जीवन दोबारा लौटता है।

First Village of India

भारत की प्रथम चाय की दुकान

माणा आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक गांव की संकरी पगडंडियों और पारंपरिक लकड़ी व पत्थरों से बने घरों का लुत्फ उठाते हैं। यहां की ‘भारत की प्रथम चाय की दुकान’ (First Tea Shop of India) पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र है, जहां हर कोई चाय की चुस्की लेना पसंद करता है।

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कैसे पहुंचें माणा गांव

हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट (देहरादून) है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश / योग नगरी ऋषिकेश है।

सड़क मार्ग: ऋषिकेश से राष्ट्रीय राजमार्ग-58 (NH-58) होकर लगभग 295 किमी का सफर तय करके बद्रीनाथ पहुंचा जा सकता है। बद्रीनाथ से माणा के लिए स्थानीय टैक्सी मिलती है या अलकनंदा के किनारे 3 किमी की पैदल यात्रा करके भी पहुंचा जा सकता है।

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