जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO, कारगिल विजय के नायक को मिली बड़ी जिम्मेदारी

Air Marshal Jitendra Mishra

Ram Mandir CEO: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम का औपचारिक ऐलान कर दिया है। भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे वायुसेना के वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड की कमान संभाली थी।

कारगिल युद्ध से लेकर 3,000 घंटे की उड़ान का शानदार कॅरियर

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे। अपने 38 वर्षों से अधिक के सेवाकाल में उनके पास 3,000 से अधिक घंटों का उड़ान अनुभव है, जिसमें उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के फाइटर जेट, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। कारगिल युद्ध (ऑपरेशन सफेद सागर) के दौरान मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने वाली टीम का वे प्रमुख हिस्सा थे, जिनका इस्तेमाल टाइगर हिल और मुंथो ढालो के हमलों में हुआ था। वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (खड़कवासला), एयर फोर्स एकेडमी (डुंडीगल) और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के पूर्व छात्र रहे हैं।

600 अंकों का मूल्यांकन ढांचा और AI स्क्रीनिंग से हुआ चयन

राम मंदिर के पहले CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्क्रीनिंग और 600 अंकों के मैनुअल मूल्यांकन ढांचे का इस्तेमाल किया गया। प्रारंभिक चरण में 3,577 उम्मीदवारों की जांच के बाद 470 से अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों को शॉर्टलिस्ट किया गया। इसके बाद 108 आवेदकों का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्राथमिक साक्षात्कार हुआ और अंत में 16 उम्मीदवारों का गहन व्यक्तिगत इंटरव्यू लेने के बाद एयर मार्शल मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई गई।

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चंदा विवाद के बीच हुई हाई-प्रोफाइल नियुक्ति

बुधवार को अयोध्या में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास, स्वामी कमलनयन दास, अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन, ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास और कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की मौजूदगी में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के आरोपों के बाद 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और पूर्व महासचिव चंपत राय व ट्रस्टी अनिल मिश्रा को इस्तीफा देना पड़ा था। प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से इस पद को सृजित किया गया है।

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