नेपाल में भीषण बाढ़ की वजह: 4.9 तीव्रता के भूकंप से टूटा सर्क ग्लेशियर, ISRO ने जारी की शुरुआती स्टडी
Nepal Flood: नेपाल के रसुवा क्षेत्र और तिब्बत की सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के कारणों पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की इकाई राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) ने पहली सैटेलाइट आधारित वैज्ञानिक स्टडी जारी की है। इसरो के अनुसार, आपदा की शुरुआत तिब्बत के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र में हुई, जहां 26 अगस्त 2026 की सुबह 8:22 बजे (IST) 4.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इस भूगर्भीय झटके के कारण कटोरे के आकार का सर्क ग्लेशियर (Cirque Glacier) ढह गया और एक विशाल आिस-रॉक एवलॉन्च (बर्फ और चट्टानों का हिमस्खलन) हुआ।
अस्थायी झील बनने के बाद अचानक फूटा मलबे का सैलाब
उपग्रह चित्रों (ResourceSat-2A और Sentinel-2) के विश्लेषण से पता चला कि ग्लेशियर ढहने से निकले विशाल मलबे ने पहले त्रिशूली नदी के बहाव को अस्थायी रूप से रोक दिया, जिससे वहां पानी का भारी भराव हुआ। इसके बाद जब यह अवरोध अचानक टूटा, तो लाखों क्यूसेक पानी, मिट्टी और चट्टानें अति-तीव्र वेग से निचले इलाकों की ओर बह निकलीं। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने भी पुष्टि की है कि दर्ज हुई भूकंपीय तरंगें वास्तव में ग्लेशियर ढहने और मलबे के तीव्र बहाव के कारण ही उत्पन्न हुई थीं।

भारत पर प्रत्यक्ष खतरा सीमित
इस भीषण आपदा में अब तक 160 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 133 भारतीयों सहित 750 लोग लापता हैं। पानी के भयंकर वेग में कई पुल, होटल, सड़कें और टेलीकॉम टॉवर ताश के पत्तों की तरह बह गए। NRSC विशेषज्ञों के अनुसार, चूंकि इस आपदा का मुख्य उद्गम स्थल भारत-नेपाल सीमा से 200 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित है, इसलिए इसका प्रत्यक्ष और गंभीर प्रभाव मुख्य रूप से तिब्बत और नेपाल के नदी गलियारों तक ही सीमित रहने की संभावना है।
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— Umashankar Singh उमाशंकर सिंह (@umashankarsingh) August 27, 2026
सर्क ग्लेशियर और आपदा से जुड़ी मुख्य बातें
आपदा का प्राथमिक कारण: 4.9 तीव्रता के भूकंप के झटके से तिब्बत के सर्क ग्लेशियर का टूटना।
सर्क ग्लेशियर (Cirque Glacier): पहाड़ों की ढलानों पर कटोरे (Bowl-shaped) के आकार में जमा बर्फ के ग्लेशियर, जो भौगोलिक असंतुलन से अचानक नीचे खिसक जाते हैं।
इस्तेमाल किए गए सैटेलाइट: इसरो का ResourceSat-2A और यूरोपीय स्पेस एजेंसी का Sentinel-2।
प्रभावित नदियां: त्रिशूली नदी और भोटे कोशी नदी का तटीय क्षेत्र।
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