पंद्रह अगस्त स्वतंत्रता दिवस
पंद्रह अगस्त स्वतंत्रता दिवस,
चिंतन संकल्प साधना का दिन।
स्वतंत्रता गई क्यों यह चिंतन,
अक्षुण रहे अल्पना का दिन।।
क्यों टूटी कड़ियाँ यह सोचो,
क्यों पौरुष असहाय हो गया।
किसने गौरी को यहां बुलाया,
शत्रु को कौन सहाय हो गया।।
क्या आस्तीन के सांप अभी भी,
डसें मौके की तलाश में जुटे हैं।
विघटन के हर प्रयत्न में आगे,
भारत गौरव के ह्रास में जुटे हैं।।
बड़ी चुनती है भारत सपूतों को,
आगे बढ़कर सब तिलक करो।
अपने संकल्प पराक्रम रण से,
भारत के गौरव का वरण करो।।
– बृजेंद्र पाल सिंह
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