उमर और पायल की ओबेरॉय होटल से शुरू हुई थी लव स्टोरी, सुप्रीम कोर्ट ने 32 साल पुराना वैवाहिक रिश्ता खत्म करने की दी मंजूरी
Omar Abdullah Payal Divorce: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला के बीच बीते कई सालों से चला आ रहा कानूनी विवाद आखिरकार समाप्त हो गया है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दोनों पक्षों के बीच हुए आपसी समझौते और रजामंदी के आधार पर 32 साल पुराने वैवाहिक रिश्ते (1994 में हुई शादी) को औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दी जानकारी
शीर्ष अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ को सूचित किया कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से अलग होने पर राजी हो गए हैं और अब दोनों ने स्वतंत्र जीवन अपनाने का फैसला किया है।
कपिल सिब्बल ने अदालत में कहा, दोनों पक्षों ने स्वतंत्रता स्वीकार कर ली है। संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने के लिए संयुक्त आवेदन दाखिल किया गया है और सभी लंबित मुकदमों को वापस लेने पर भी सहमति बन गई है।
इस पर पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत समझौते की शर्तों के आधार पर ही अपना फैसला सुनाएगी और दोनों के बीच जारी सभी कानूनी मुकदमों को बंद कर दिया जाएगा।

ओबेरॉय होटल से शुरू हुई थी लव स्टोरी, 1994 में हुई थी शादी
पहली मुलाकात: राजनीति की मुख्यधारा में कदम रखने से पहले उमर अब्दुल्ला दिल्ली के प्रसिद्ध ओबेरॉय होटल ग्रुप में बतौर मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव कार्यरत थे। पायल भी उसी होटल में काम करती थीं, जहाँ दोनों की पहली मुलाकात हुई जो आगे चलकर दोस्ती और प्यार में बदल गई।
अंतरधार्मिक विवाह: 1 सितंबर 1994 को दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया। उमर मुस्लिम परिवार से थे, जबकि पायल सिख परिवार से (उनके पिता मेजर जनरल राम नाथ थे)।
व्यवसायिक करियर: शादी के बाद भी पायल एक सफल बिजनेसवुमन के रूप में दिल्ली से अपना काम संभालती रहीं और सामाजिक कार्यक्रमों में उमर के साथ नजर आती थीं।
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निचली अदालतों से सुप्रीम कोर्ट तक का कानूनी सफर
उमर अब्दुल्ला और पायल पिछले कई वर्षों (2009 से) अलग रह रहे थे। उमर ने दिल्ली की फैमिली कोर्ट में क्रूरता और परित्याग के आधार पर तलाक की याचिका लगाई थी, जिसे अगस्त 2016 में फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
इसके बाद दिसंबर 2023 में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए तलाक देने से इनकार कर दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट के इसी फैसले को चुनौती देते हुए उमर अब्दुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोनों पक्षों को मध्यस्थता (Mediation) का अवसर दिए जाने के बाद दोनों पक्षों ने सौहार्दपूर्ण माहौल में आपसी सहमति से हमेशा के लिए अलग होने का ऐतिहासिक फैसला किया।
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