भाजपा का समरसता संकल्प अभियान, बदलेगा राजनीतिक समीकरण

Sant Ravidas 650th Birth Anniversary
Mrityunjay Dixit
मृत्युंजय दीक्षित

वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश व पंजाब सहित कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के दृष्टिगत भारतीय जनता पार्टी ने संत रविदास की 650वें जयंती वर्ष को संत रविदास सामाजिक समरसता संकल्प अभियान के रूप में आरंभ किया है। यह अभियान ओबीसी और दलित समाज में सामाजिक समरसता का संदेश देने और समाजवादी पार्टी के पीडीए के नारे का ध्वस्त करने के लिए है। यूपी की योगी सरकार 2017 से ही विभिन्न जातियों के महापुरुषों के सम्मान में अनेक कार्य कर रही है। संत रविदास धर्मान्तरण के विरुद्ध इतने मुखर थे कि उन्होंने मुगल बादशाह सिकंदर लोधी से कह दिया था कि तुम खुद हिंदू बन जाओ। संत रविदास जीवन पर्यंत धर्मान्तरण के विरुद्ध जनचेतना फैलाते रहे।

संत शिरोमणि रविदास महाराज के 650वें प्रकाश पर्व पर सीर गोवर्धनपुर स्थित उनकी जन्मस्थली पर भव्य कलश पूजन का आयोजन हुआ। संत रविदास मंदिर के समीप बने पार्क में 131 कलशों में जन्मस्थली की पावन मिट्टी भरी गई। संतों ने इन कलशों को संत रविदास के चरणों में रखकर विधि विधान से पूजन किया। भव्य कलश यात्रा निकाली गई। सभी कलश संत रविदास मंदिर में स्थापित किये गए। वाराणसी शहर से संकल्प यात्राओं का आरम्भ हो गया है। पंजाब के जालंधर से वाराणसी तक समरसता यात्राएं निकाली जाएंगी। 131 कलशों की इस यात्रा के सभी कलश देशभर में भेजे जा रहे हैं। इनमें 104 कलश यूपी में और 27 कलश अन्य राज्यों में जाएंगे।

पांच अक्टूबर से पांच नवंबर तक जालंधर से वाराणसी आने वाली संत रविदास समरसता यात्रा पंजाब और यूपी के उन गांवों व कस्बों से गुजरेगी जहां दलित व ओबीसी जाति के लोग अधिक हैं। दलित समुदाय के एक बड़े वर्ग में संत रविदास का बहुत अधिक सम्मान है। संत रविदास महाराज सामाजिक समरसता संकल्प अभियान के आरम्भ में प्रदेशभर के 18 मंडलों में कुल 60 हजार दीप जलाकर संत रविदास के संदेशों का प्रकाश फैलाया गया।

भदोही जिले का नाम संत रविदास के नाम पर मुख्यमंत्री ने वाराणसी के समीपवर्ती भदोही जिले का नामकरण फिर से संत रविदास कर दिया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने संत रविदास महाराज जी के नाम से बने जिले का नाम भदोही करके बड़ा पाप किया था। हमारी श्रद्धा संत रविदास जी के प्रति है। अब एक बार फिर भदोही जिला संत रविदास नगर के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि प्रत्येक जनपद में एक मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालय को आवासीय बनाएंगे और यह संत रविदास महाराज के नाम पर होंगे। प्रदेश में बनाए जा रहे टेक्सटाइल्स पार्क कबीर दास जी के नाम पर होंगे।

उप्र अनुसूचित जाति हित एवं विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने भी सपा पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि दलितों के वोट की खातिर सपा प्रमुख पीडीए की बात कर रहे हैं, ये वही हैं जिन्होंने कभी सत्ता में रहते हुए दलित समाज से आने वाले संत रविदास के नाम से बने जिले का नाम भदोही कर दिया था।

भाजपा ने आगामी चुनावों के दृष्टि से सामाजिक समरसता गतिविधियों के माध्यम से हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाने का संकल्प लिया है। इनमें कलश पूजन, भजन-कीर्तन, संगोष्ठियां आदि आयोजित की जाएंगी। चार सितंबर को सभी विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष कार्यक्रम करेगी। इसी प्रकार महारानी अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर बने महाविद्यालय का नाम बदले का मुद्दा भी उठाया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण की की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम किए जायेंगे।

भाजपा दलित समाज को बताएगी कि सपा ने किस प्रकार उनके महापुरुषों का अपमान किया है। सपा ने सितंबर 2012 को कन्नौज के तिरवा में बने बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर के नाम पर बने मेडिकल कालेज का नाम बदल दिया था। भाजपा दलित व ओबीसी समाज को अपने साथ जोड़ने के लिए ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, ऊदा देवी, झलकारी बाई, वीरा पासी, लाखन पासी और रमाबाई आंबेडकर जैसे 15 महापुरुषों को लेकर एक व्यापक सामाजिक समरसता अभियान चलाएगी।

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प्रदेश में 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद दलित महापुरुषों का वृहद स्तर सम्मान किया जा रहा है। बहराइच में महाराजा सुहेलदेव राजभर को सम्मान देने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं व उनका भव्य स्मारक भी बना है। अयोध्या में दिव्य व भव्य राम मंदिर में महर्षि वाल्मीकि सहित कई संतों के मंदिर बने हैं। अयोध्या में ही माता शबरी का भी मंदिर बना है। अनेक मेडिकल कालेजों व शैक्षणिक संस्थानों का नामकरण महापुरुषों के नाम पर ही किया जा रहा है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद वाराणसी में संत रविदास महाराज का दिव्य व भव्य मंदिर बना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही जिले का नाम पुनः संत रविदास के नाम पर करके एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है किंतु अभी उनके तरकश में अनेक तीर हैं जो चुनाव आने तक लगातार चलते रहेंगे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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