रामलला के हार और चरण पादुका गायब होने की आशंका, SIT जांच में खुलासा

Ram Lalla Jewelry Missing

Ayodhya Ram Mandir Case: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और आभूषणों की कथित चोरी का मामला गहराता जा रहा है। मामले की कमान संभाल रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी तफ्तीश बेहद तेज कर दी है। जांच के दायरे में अब न केवल दानपात्रों की नकदी, बल्कि भगवान रामलला के आभूषण भी आ गए हैं। ताजा इनपुट के मुताबिक, रामलला का हीरा जड़ित मुख्य हार और पवित्र चरण पादुका मंदिर परिसर से गायब होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे सुरक्षा और प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

पुजारी का बयान और गायब आभूषणों पर सस्पेंस

एसआईटी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मंदिर से जुड़े प्रमुख सेवादारों— गोपाल राव और टिन्नू यादव से दोबारा सघन पूछताछ की है। जांच टीम ने जब राम मंदिर के मुख्य पुजारी से हीरा जड़ित हार और चरण पादुका के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि ये बहुमूल्य चीजें भगवान को पहनाने के बाद नियमानुसार टिन्नू यादव को सौंप दी गई थीं।

जब टिन्नू यादव से इस पर जवाब मांगा गया, तो उसने दावा किया कि इन आभूषणों को गलाकर सोने की ईंट बनाने की योजना थी। हालांकि, जब आभूषणों के रखरखाव के जिम्मेदार कृष्ण देव तिवारी से इस बारे में पूछताछ की गई, तो लॉकर में न तो कोई सोने की ईंट मिली और न ही इसकी कोई आधिकारिक रसीद या दस्तावेज बरामद हुआ।

Ram Mandir Ayodhya Donation Theft

चेन्नई से तलब किए गए ट्रस्टी

एसआईटी अब तक इस मामले में करीब 5 दर्जन (60 से अधिक) कर्मचारियों, सेवादारों और बैंक प्रतिनिधियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच टीम ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को चेन्नई से तत्काल अयोध्या तलब किया और उनसे कई घंटों तक पूछताछ की।

संग्रह और जमा प्रक्रिया: दानपात्रों से नकदी और सोना-चांदी निकालने से लेकर उन्हें काउंटिंग सेंटर और फिर बैंक में जमा करने के बीच की कड़ियों की जांच।

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तकनीकी साक्ष्य: मंदिर के सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और लॉकर रूम के दस्तावेजों का बारीकी से मिलान किया जा रहा है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के इस आधिकारिक प्रोटोकॉल और व्यवस्था से ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को पूरी तरह दूर रखा गया है और जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों को सौंपी गई है। विपक्ष जहां इस पूरे मामले की निष्पक्ष और न्यायिक जांच की मांग कर रहा है, वहीं सरकार ने साफ किया है कि करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक इस मंदिर में किसी भी स्तर पर हुई अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी।

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