Bakrid 2026: क्या हैं कुर्बानी के जरूरी नियम, जानें जानवर की उम्र, हिस्सेदारी और मांस बांटने का सही तरीका

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Bakrid 2026: ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का त्योहार इस्लाम धर्म में त्याग, समर्पण और इंसानियत का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष भारत में 28 मई, 2026 को बकरीद का पर्व मनाया जाएगा। यह दिन पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस महान सुन्नत की याद दिलाता है, जब उन्होंने अल्लाह की रजा के लिए अपनी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी देने का फैसला किया था।

अक्सर बकरीद के मौके पर कुर्बानी के तौर-तरीकों, नियमों और शर्तों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। आइए, शरीयत के अनुसार इन नियमों को बेहद आसान भाषा में समझते हैं।

1. किन जानवरों की कुर्बानी जायज है और उनकी उम्र क्या होनी चाहिए

इस्लामी नियमों (शरीयत) के मुताबिक केवल चुनिंदा पालतू और हलाल जानवरों की ही कुर्बानी दी जा सकती है। इसके लिए जानवरों का पूरी तरह स्वस्थ होना अनिवार्य है। बीमार, अत्यधिक कमजोर, अंधे या लंगडेक जानवर की कुर्बानी मान्य नहीं होती।

2. किस जानवर में कितने लोग हिस्सा ले सकते हैं

कुर्बानी के जानवरों को छोटे और बड़े दो श्रेणियों में बांटा गया है।

अकेले व्यक्ति के लिए (एक हिस्सा): बकरा, बकरी, भेड़ और दुंबा की कुर्बानी केवल एक व्यक्ति के नाम से ही हो सकती है। इसमें हिस्सेदारी नहीं की जा सकती।

सामूहिक हिस्सेदारी (अधिकतम 7 हिस्से): बड़े जानवर जैसे ऊंट, बैल और भैंस की कुर्बानी में अधिकतम 7 लोग मिलकर हिस्सा ले सकते हैं। ध्यान रहे कि इसमें सभी सातों साझेदारों का हिस्सा और नीयत बराबर होनी चाहिए।

3. साहिब-ए-निसाब कौन हैं और किस पर कुर्बानी फर्ज है

इस्लाम में कुर्बानी हर उस मुसलमान पर फर्ज (अनिवार्य) है जो साहिब-ए-निसाब है।

साहिब-ए-निसाब का मतलब: वह व्यक्ति जिसके पास अपनी बुनियादी जरूरतों और कर्ज को हटाने के बाद एक तय मात्रा (निसाब) के बराबर सोना, चांदी या नकदी/माल-दौलत मौजूद हो।

जो लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं या जिनके पास इस तय सीमा के बराबर संपत्ति नहीं है, उन पर कुर्बानी फर्ज नहीं होती। वे चाहें तो किसी बड़े जानवर में एक छोटा हिस्सा ले सकते हैं।

4. कुर्बानी का मांस बांटने का सही इस्लामी तरीका

कुर्बानी के गोश्त (मांस) को केवल खुद तक सीमित रखना सही नहीं माना जाता। परंपरा के अनुसार इसके तीन बराबर हिस्से किए जाने चाहिए।

पहला हिस्सा: अपने खुद के परिवार और बच्चों के लिए।

दूसरा हिस्सा: अपने रिश्तेदारों, पड़ोसियों और दोस्तों के लिए।

तीसरा हिस्सा: गरीब, यतीम और जरूरतमंद लोगों के लिए, ताकि कोई भी इस दिन भूखा न रहे।

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5. कुर्बानी करते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

कुर्बानी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि अल्लाह की इबादत है। इसलिए इन बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है।

पशु क्रूरता से बचें: जानवर को कम से कम तकलीफ हो, इसके लिए बेहद तेज धार वाले औजार का इस्तेमाल करें। एक जानवर के सामने दूसरे जानवर को न काटें।

साफ-सफाई और संवेदनशीलता: कुर्बानी हमेशा बंद या तय जगहों पर करें। खुलेआम ऐसी जगह न करें जिससे दूसरों में डर पैदा हो या गंदगी फैले। साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।

नीयत: कुर्बानी का मकसद दिखावा या गोश्त खाना नहीं, बल्कि अल्लाह के प्रति सच्ची निष्ठा और नीयत होना चाहिए।

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