उत्तरोत्तर सुधार की ओर अग्रसर उत्तर प्रदेश की काननू व्यवस्था

NCRB Crime in India Report 2024
Mrityunjay Dixit
मृत्युंजय दीक्षित

राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की क्राइम इन इंडिया-2024 की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय न्याय संहिता व आईपीसी श्रेणी के तहत कुल अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में 18वें स्थान पर रहा है। एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय अपराध की दर 252.3 है, जबकि यूपी की दर 180.02 है। यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री की उत्तर प्रदेश में कानून के शासन की स्थापना के दावे का समर्थन करती है। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद से आम जनता भी कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार का अनुभव कर रही है। एंटी रोमियो स्क्वायड, महिला हेल्प डेस्क, फास्ट ट्रैक कोर्ट, बुलडोज़र एक्शन और अतीक तथा मुख़्तार जैसे बड़े अपराधियों के मिट्टी में मिलने से वातावरण बदला है।

उत्तर प्रदेश ने अपनी विशाल आबादी के अनुपात में राष्ट्रीय औसत में बेहतर प्रदर्शन किया है। एनसीआरबी के तीन वर्षों के तुलनात्मक आंकड़ों ने प्रदेश में कानून व्यवस्था में लगातार सुधार की तस्वीर प्रस्तुत की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महिला सुरक्षा के प्रति काफी संजीदा हैं और महिलाओं को न्याय दिलाने में उत्तर प्रदेश पहले नंबर पर आ गया है। एनसीआरबी की रिपेार्ट के अनुसार हत्या, दुष्कर्म और महिलाओं के विरुद्ध अपराध में उत्तर प्रदेश की स्थिति राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही है। हालाकि दहेज हत्या के मामले प्रदेश में अभी भी चिंता का विषय बने हुए हैं। यूपी मे हत्या की दर 1.3 रही जबकि राष्ट्रीय औसत 1.9 है। इस श्रेणी में राज्य 29वें स्थान पर रहा। इसी प्रकार दुष्कर्म के मामलों में प्रदेश की अपराध दर 2.8 रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 4.3 है । इस श्रेणी में राज्य 24 वें स्थान पर है। इसी प्रकार महिलाओं के खिलाफ अपराध की कुल दर यूपी में 58.0 रही जो राष्ट्रीय औसत 64.6 से कम है। इस श्रेणी में राज्य 17वें स्थान पर रहा।

महिलाओं के विरुद्ध हुए अपराधों में अपराधियों को सजा दिलाने के मामले में भी यूपी आगे रहा है। वर्ष 2024 में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों मे दोषसिद्धि दर यूपी में 76.6 % दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में यूपी की अदालतों में महिलाओं के खिलाफ कुल अपराधों के 3,52,664 मामले सुनवाई के लिए आए थे। इनमें से 27,639 मामलो की सुनवाई पूरी हुई और 21169 मामलों में अपराधियों को सजा सुनाई गई। प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे एंटी रोमियो अभियान का असर रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रहा है। इस अभियान के कारण छेड़छाड़ के मामलों में भी काफी गिरावट आई है। प्रदेश में सिर्फ महिलाओं के प्रति अपराध में ही कमी नहीं आई है, अपितु एससी -एसटी समुदायों के खिलाफ अपराधों में भी काफी कमी आई है। ऐसे मामलों की संख्या 15,130 से घटकर 14,642 रह गई है। जो 3.2 फीसदी की गिरावट है। 2022 के मुकाबले यह कमी 4.7 फीसदी रही। एससी-एसटी समुदाय के लोगों की हत्या के मामलों में भी 7 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ये आंकड़ा 157 से घटकर 146 रह गया।

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माफिया आतंक के खिलाफ लगातार अभियान चल रहा है, जिसके फलस्वरूप प्रदेश में कानून व्यवस्था का राज स्थापित होने में सफलता प्राप्त हो रही है। प्रदेश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि जिन माफियाओं ने जमीनों पर अवैध कब्जे कर रखे थे उन्हें कब्जे से मुक्त करा कर उन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनवाकर गरीबों को आवंटित किए जा रहे हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट में सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश में वर्ष 2024 में कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ।

विगत नौ वर्षों में यूपी पुलिस ने 269 अपराधियों को मुठभेड़ मे मार गिराया था। अब इनकी संख्या बढ़कर 272 हो गई है। वहीं पुलिस मुठभेड़ में घायल अपराधियों की संख्या 11,051हो गई है। यूपी पुलिस ने बताया कि विगत नौ वर्षों में संबंधित अदालतों में प्रभावी पैरवी कर 1,25,985 से अधिक अभियुक्तों को दोषसिद्ध कराया जा चुका है। 79 अपराधियों को मृत्युदंड, 10414 को आजीवन कारावास और 1921 अपराधियों को 20 वर्ष से अधिक की सजा दिलाई जा चुकी है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध व आतंक के प्रति जीरो टालरेंस की नीति प्रभावशाली रही है, जिसके कारण अपराधी अपना जीवन सुरक्षित रखने के लिए या तो आत्मसमर्पण कर रहे हैं या फिर जीवन जीने का तरीका बदल रहे हैं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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