Deoria News: कवियों और शायरों ने रचनाओं से मोहा मन, मां के प्रेम और संवेदना के रंग बिखरे

Deoria Kavi Sammelan

Deoria News: नागरी प्रचारिणी सभा, देवरिया द्वारा आयोजित भव्य कवि गोष्ठी में कवियों, गीतकारों एवं शायरों ने विविध भाव, छंद और रस से ओतप्रोत अपनी श्रेष्ठ रचनाओं की प्रस्तुति देकर उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मातृदिवस के पावन अवसर पर आयोजित इस विशेष साहित्यिक आयोजन में मां की महिमा, प्रेम, संवेदना, श्रृंगार और सामाजिक चेतना के विविध रंग एक साथ दिखाई दिए। पूरा वातावरण साहित्यिक रस से सराबोर रहा।

वाणी वंदना से हुआ शुभारंभ, मां की महिमा में गूंजी कविताएं

कार्यक्रम के प्रारंभ में सौदागर सिंह ने वाणी वंदना प्रस्तुत कर साहित्यिक वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मातृदिवस की गरिमा को केंद्र में रखते हुए सभा के पूर्व मंत्री इंद्र कुमार दीक्षित ने मां की विशेषता और महत्ता को समर्पित अपनी भावपूर्ण पंक्तियाँ सुनाकर खूब प्रशंसा अर्जित की। उन्होंने कहा, ”जिसे सर्वस्व गंवाकर प्यार पाना अच्छा लगता है, जिसे परिवार पर सब कुछ लुटाना अच्छा लगता है… उसी देवी को मां कहकर बुलाना अच्छा लगता है।”

श्रृंगार रस से लेकर मातृत्व की गरिमा तक, हर रचना रही विशेष

इसके बाद छेदी प्रसाद गुप्त ‘विवश’ ने ‘सउदा बना के कहां जात बानी, गमकत बा देहिया सुगंध रात रानी’ गीत सुनाकर श्रोताओं को श्रृंगार रस में डुबो दिया। रीना तिवारी ने ‘किसी ने ठीक ही मां को खुदा का नाम दिया, जो खुद टूट के बिखरी, हमें आराम दिया’ के माध्यम से मां के त्याग को स्वर दिया। कीर्ति त्रिपाठी ने ‘मां तेरा होना ही हमारे लिए वरदान है, तेरे कदमों में ही सारा जहां है’ सुनाकर मातृत्व की गरिमा को अभिव्यक्त किया।

Deoria Kavi Sammelan

प्रसिद्ध शायर फिगार देवरियावी ने ‘जन्नत’ का किया जिक्र

कार्यक्रम का संचालन कर रहीं प्रार्थना राय ने ‘रात भर नींद नैनों में आती नहीं, सूनी रातों में जब याद आती है मां’ प्रस्तुत कर भावनाओं को गहराई दी। प्रसिद्ध शायर फिगार देवरियावी ने ‘ज़िक्र आया जो मां के कदमों का, याद फिर आ गई जन्नत की’ सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई प्रदान की। रामेश्वर तिवारी ‘राजन’ ने ‘दिल में इक तस्वीर बन गयी, खामोशी अब तीर बन गयी’ से अपने हृदय की संवेदनाएं व्यक्त कीं।

कवि गोष्ठी की अध्यक्षता निराला शब्द संवाद मंच के अध्यक्ष ओमप्रकाश द्विवेदी ने की। इस अवसर पर उनकी संस्था की ओर से डॉ. जयनाथ मणि त्रिपाठी, डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी, इंद्र कुमार दीक्षित एवं डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी को सम्मानित किया गया। हिंदी साहित्य भारती की ओर से ओमप्रकाश द्विवेदी ने इंद्र कुमार दीक्षित एवं भीम प्रसाद प्रजापति के हाथों वयोवृद्ध गीतकार गिरिधर करुण को सम्मानित कराया। सभा के मंत्री डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी ने ओमप्रकाश द्विवेदी एवं एसबी शुक्ल को उत्तरीय भेंट कर सम्मानित किया।

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गोष्ठी में रंजीता श्रीवास्तव, पार्वती देवी गौरा, क्षमा श्रीवास्तव, विनोद कुमार अग्रवाल, कौशल किशोर मणि, दयाशंकर कुशवाहा, मुक्तिनाथ त्रिपाठी, सच्चिदानंद सवेरा, उमेश चंद्र तिवारी, डॉ. एसएन मणि, वशिष्ठ चौबे, श्वेता राय, एमपी गोड़, रविनंदन सैनी ने भी अपनी रचनाओं से साहित्यिक रसधारा प्रवाहित की।

साहित्यप्रेमियों की रही भीड़, संस्कारों का हुआ सींचन

इस अवसर पर डॉ. दिवाकर प्रसाद तिवारी, रवींद्र नाथ तिवारी, राणा प्रताप सिंह, भीम प्रसाद प्रजापति, राकेश कुशवाहा, विनोद कुमार अग्रवाल, लालता प्रसाद चौधरी, सुबास राय, नित्यानंद आनंद, सरोज कुमार पांडेय, शिखा श्रीवास्तव, ब्रजेश पांडेय (अधिवक्ता), रेनु गुप्ता, रविनंदन सैनी, प्रवीण मणि त्रिपाठी, अजहर, सद्दाम अंसारी, डॉ. मधुसूदन मिश्र, नीलम भारती, डॉ. मधुसूदन मणि त्रिपाठी, रमेश सिंह ‘दीपक’, शिखा गौड़ सहित अनेक गणमान्य साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कवि गोष्ठी ने साहित्य संस्कारों को सींचने और हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को पुनर्जीवित करने का कार्य किया।

रिपोर्ट- अरविंद अजनवी

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