श्रीनगर के तीर्थस्थलों में गुरुकुलों की ऐतिहासिक आध्यात्मिक यात्रा, वैदिक संस्कृति के संरक्षण का लिया संकल्प
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में स्थित पावन तीर्थस्थलों में ऋषि कुमारों एवं आचार्यों ने अपनी प्राच्य गौरवशाली वैदिक संस्कृति एवं परम्परा के विषय में ज्ञानवर्धन किया। उन्होंने यहां श्रीशंकराचार्य मंदिर, ज्येष्ठा माता मंदिर, रूप भवानी मंदिर, मुगल गार्डन, चश्माशाही एवं डल झील में नौका विहार करते हुए दर्शन एवं भ्रमण किया। यह यात्रा शैक्षणिक, आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को समर्पित थी।
यह यात्रा राष्ट्रधर्म की पुनर्स्थापना का सशक्त माध्यम बनेगी
इस पुण्य अवसर पर जम्मू-कश्मीर प्रान्त के गुरुकुल एवं मंदिर सेवा योजना के प्रमुख डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में यात्रा के गूढ़ एवं व्यापक स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रान्त में होने वाली यह यात्रा केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है, अपितु यह सनातन वैदिक संस्कृति के संरक्षण, जागरण, आत्मोन्नति तथा व्यवहारिक जीवन के परिष्कार में भी सहायक सिद्ध होने वाली है।
डॉ. उपाध्याय ने कहा, ‘यह यात्रा आत्मा के उत्कर्ष, संस्कारों के संवर्धन एवं राष्ट्रधर्म की पुनर्स्थापना का सशक्त माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के प्रेरणा एवं संगठन के प्रयास से आरम्भ हुई है, जो आगे भी अनवरत चलने वाली है।

वैदिक परम्परा गुरुकुलों में संरक्षित एवं संवर्धित हो रही
इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर पुलिस विभाग के महानिदेशक (आईजीपी) सुजीत सिंह चौहान (आईपीएस) ने कहा कि आज भी भारत में वैदिक परम्परा गुरुकुलों में संरक्षित एवं संवर्धित हो रही है। उन्होंने वेद कंठस्थ किए हुए ऋषि कुमारों से ऋग्वेद एवं अथर्ववेद के मंत्र सुनकर खुद को मंत्रमुग्ध बताया। संस्कृत एवं वैदिक परम्परा के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए चौहान ने कहा, सनातन संस्कृति का आधार संस्कृत है और तन, मन, धन से इसका संरक्षण करना हमारा परम कर्तव्य है।
कश्मीर में पलायन से पूर्व कई गुरुकुल थे संचालित
कश्मीरी समाज के अधिकारों की आवाज के रूप में कार्य करने वाले डॉ. संदीप मावा ने बताया कि कश्मीर में पलायन से पूर्व कई गुरुकुल संचालित होते थे, जहां से भारतीय ज्ञान परम्परा को देश में जन-जन तक पहुंचाया जाता था। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि आज इसका अभाव दिख रहा है और ऐसी स्थिति में गुरुकुलों की यह यात्रा बहुत ही प्रेरणा देने वाली सिद्ध होगी।
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गुरुकुल निःशुल्क व्यवस्था में कर रहे शिक्षा प्रदान
कार्यक्रम में दर्शनम् गुरुकुलम्, छारोड़ी (अहमदाबाद, गुजरात) के निर्देशक स्वामी यज्ञ बल्लभ दास जी ने बताया कि यह गुरुकुल सद्गुरु स्वामी माधवप्रियदास जी की सत्प्रेरणा से संचालित हो रहा है। यहां न केवल गुजरात प्रान्त के बल्कि अन्य प्रान्तों के भी कई विद्यार्थी निःशुल्क व्यवस्था में अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह विशिष्ट प्रयास समाज में जागृति लाने में सक्षम सिद्ध हो रहा है।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ कार्यक्रम सम्पन्न
इस अवसर पर आचार्य चिन्तन भाई जोशी, भागीरथ त्रिवेदी सहित समस्त आचार्यगण एवं विद्यार्थीगण की गरिमामयी उपस्थिति रही। समस्त वातावरण वैदिक मंत्रोच्चार, गुरु-भक्ति एवं आध्यात्मिक चेतना से अनुप्राणित रहा। ऋषि कुमारों ने बहुत ही रुचि से कश्मीर को समझने का प्रयास भी किया।
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