जेल में हुआ प्यार, सहायक जेल अधीक्षक फिरोजा ने पूर्व कैदी धर्मेंद्र संग रचाई शादी
छतरपुर/सतना: मध्यप्रदेश के सतना और छतरपुर जिलों के बीच इन दिनों एक ऐसी प्रेम कहानी चर्चा में है, जो किसी फिल्मी कहानी को मात देती है। यह कहानी केंद्रीय जेल सतना में पदस्थ सहायक जेल अधीक्षक (उप-जेलर) फिरोजा खातून और हत्या के मामले में सजा काट चुके पूर्व कैदी धर्मेंद्र सिंह की है। कानून की रक्षक और कानून के दायरे से बाहर रह चुके एक शख्स के बीच उपजा यह प्रेम 5 मई को विवाह के अटूट बंधन में तब्दील हो गया।
मुलाकात से विवाह तक का सफर
फिरोजा खातून और धर्मेंद्र की पहली मुलाकात जेल परिसर में हुई थी। उस समय फिरोजा वारंट शाखा की जिम्मेदारी संभाल रही थीं, जबकि हत्या के मामले में उम्रकैद भुगत रहे धर्मेंद्र वारंट संबंधी कार्यों में जेल प्रशासन की मदद करते थे। साथ काम करते-करते दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई।
रिहाई के बाद भी रिश्ता कायम
धर्मेंद्र को उसके अच्छे आचरण के कारण साल 2022 में समय से पूर्व रिहा कर दिया गया था। जेल से बाहर आने के बाद भी फोन के जरिए दोनों का संपर्क बना रहा और अंततः उन्होंने जीवन भर साथ रहने का फैसला लिया।

बजरंग दल ने निभाया कन्यादान का फर्ज
यह शादी जितनी अनोखी थी, उतनी ही चुनौतियों भरी भी रही। मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने वाली फिरोजा के इस फैसले से उनके परिवारवाले सहमत नहीं थे और उन्होंने समारोह से दूरी बना ली। ऐसे में छतरपुर के लवकुशनगर में आयोजित इस विवाह में बजरंग दल के कार्यकर्ता आगे आए। उन्होंने न केवल विवाह की रस्में पूरी कराईं, बल्कि भाई और पिता की भूमिका निभाते हुए फिरोजा का ‘कन्यादान’ भी किया।
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धर्मेंद्र सिंह का नाम साल 2007 में सुर्खियों में आया था, जब उन्हें चंदला नगर परिषद के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्ण दत्त दीक्षित की हत्या का दोषी पाया गया था। इस संगीन अपराध के लिए उन्हें उम्रकैद की सजा हुई थी। करीब 14 साल जेल में बिताने के दौरान उनके आचरण में सकारात्मक बदलाव आया, जिसके आधार पर जेल प्रशासन ने उनकी समय से पहले रिहाई की सिफारिश की थी। आज फिरोजा खातून की निर्भीकता और धर्मेंद्र के बदले हुए जीवन की यह कहानी सतना से छतरपुर तक सामाजिक सद्भाव की मिसाल के रूप में देखी जा रही है।
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