मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, वंदे मातरम अब राष्ट्रगान के समान, अपमान पर तीन साल की सजा का प्रावधान
Newschuski Digital Desk: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की पहली बैठक में ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। बैठक में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान जन गण मन के समान कानूनी दर्जा देने की मंजूरी दी गई। इसके साथ ही राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव भी पारित कर दिया गया। अब वंदे मातरम के अपमान या इसके गायन में बाधा डालने पर राष्ट्रगान की तरह ही तीन साल तक की कैद या जुर्माने का प्रावधान होगा।
दोबारा अपराध पर एक साल की न्यूनतम सजा
कैबिनेट के इस फैसले के तहत राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम की धारा-3 में आवश्यक संशोधन किया जाएगा। अब वंदे मातरम पर वही नियम और पाबंदियाँ लागू होंगी जो राष्ट्रगान पर लागू होती हैं। यानी यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर इसके गायन में बाधा डालता है या अशांति फैलाता है, तो उसे तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। दोबारा अपराध करने पर कम से कम एक साल की सजा का प्रावधान रहेगा। इससे पहले वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ध्वज के अपमानजनक उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
150वीं वर्षगांठ पर बड़ी सौगात
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। पिछले साल दिसंबर में संसद में इस अवसर पर विशेष चर्चा हुई थी, जिसमें इसे राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की मांग उठी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तब अपने वक्तव्य में कहा था कि इस गीत को तुष्टीकरण की राजनीति के कारण दरकिनार किया गया और इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश हुई। इस साल जनवरी में गृह मंत्रालय ने पहले ही प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के सभी छह अंतरों को गाने के दिशा-निर्देश जारी किए थे।
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बंगाल चुनाव में वंदे मातरम बना था मुख्य मुद्दा
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने वंदे मातरम को बंगाली अस्मिता और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया था। पार्टी ने राज्यभर में इसके सामूहिक गायन और पदयात्राओं का आयोजन किया। बंकिम चंद्र चटर्जी की विरासत को भी चुनावी अभियान में बड़े पैमाने पर उठाया गया। अब चुनाव के तुरंत बाद लिए गए इस फैसले को राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है। बजट सत्र के समापन पर संसद के दोनों सदनों में पहली बार वंदे मातरम के सभी छह अंतरों का पाठ किया जा चुका है।
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