अमेरिकी दबाव के बीच ईरान का ‘चीन मॉडल’ दांव पर, होर्मुज जलमार्ग को बनाया रणनीतिक हथियार, बढ़ते तनाव से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल
ईरान और अमेरिका के बीच करीब छह सप्ताह तक चले संघर्ष पर फिलहाल विराम जरूर लगा है, लेकिन इस्लामाबाद में हुई वार्ता के विफल रहने के बाद स्थायी समाधान की उम्मीदें अब भी अनिश्चित बनी हुई हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान पर दबाव बढ़ाते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को नहीं खोला तो अमेरिका सख्त कदम उठाएगा। ट्रंप ने इस दिशा में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी का भी संकेत दिया है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी बताई जा रही है।
ट्रंप की रणनीति में पुराना पैटर्न, दबाव बनाकर वार्ता की कोशिश
अमेरिकी राष्ट्रपति की यह चेतावनी उनकी पुरानी रणनीति की झलक देती है। इससे पहले चीन के साथ व्यापारिक टकराव के दौरान भी उन्होंने इसी तरह का दबाव बनाया था, जब चीनी निर्यात पर भारी शुल्क और 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। अब ईरान के साथ मौजूदा तनाव में भी ट्रंप उसी दबाव की नीति के जरिए बातचीत की जमीन तैयार करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।
ईरान ने अपनाया ‘चीन वाला जवाब’, होर्मुज बना सबसे बड़ा हथियार
अमेरिकी दबाव के बीच ईरान ने भी चीन की तर्ज पर जवाबी रणनीति अपनाई है। जिस तरह चीन ने अमेरिकी टैरिफ के जवाब में दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर रोक लगाकर दबाव बनाया था, उसी तरह अब ईरान होर्मुज जलमार्ग पर अपने नियंत्रण का इस्तेमाल कर रहा है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है। ऐसे में ईरान इसे अपने सबसे प्रभावी रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
युद्ध के बाद बदला समीकरण, जलमार्ग पर ईरान का कड़ा नियंत्रण
युद्ध से पहले होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता था, जहां ईरान की सीमित दखलअंदाजी होती थी। हालांकि संघर्ष के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं। अब ईरान टैंकरों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर चुका है और यह तय कर रहा है कि किन जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इसके साथ ही सुरक्षित मार्ग देने के बदले शुल्क वसूलने की कोशिश भी की जा रही है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
तेल बाजार में उछाल, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका
होर्मुज जलमार्ग को लेकर बढ़ते गतिरोध का असर वैश्विक तेल बाजार में साफ नजर आ रहा है। अमेरिकी चेतावनी के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 8 प्रतिशत का उछाल आया है और यह 103 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो कीमतों में और तेजी आ सकती है। ईरान का रोजाना करीब 20 लाख बैरल तेल निर्यात वैश्विक आपूर्ति में अहम भूमिका निभाता है, ऐसे में किसी भी बाधा से बाजार में अस्थिरता बढ़ना तय है।
ईरान का सख्त संदेश, महंगे ईंधन के लिए दुनिया को किया आगाह
दूसरी ओर ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह आर्थिक दबाव झेलने के लिए तैयार है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मौजूदा पेट्रोल कीमतों का आनंद ले लीजिए, क्योंकि आने वाले समय में कीमतें 4 से 5 डॉलर प्रति लीटर तक पहुंच सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि यह टकराव लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ेगी और आम लोगों पर आर्थिक बोझ और गहरा होगा।
