केंद्र सरकार ने बढ़ाई डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी, एटीएफ पर भी लगा शुल्क

diesel export duty hiked

नई दिल्ली: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का असर अब भारत समेत पूरी दुनिया के फ्यूल बाजार पर साफ नजर आ रहा है। इसी माहौल से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने शनिवार को एक बड़ा फैसला लिया। सरकार ने हाई-स्पीड डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी और इंफ्रा सेस में जोरदार बढ़ोतरी कर दी है।

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी को 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर अब 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी कुल मिलाकर इसमें 34 रुपये प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। यह बढ़ोतरी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। सरकार ने हाई-स्पीड डीजल पर दो तरह के शुल्क बढ़ाए हैं।

स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी: 24 रुपये प्रति लीटर

रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस: 36 रुपये प्रति लीटर

बता दें कि इससे पहले 26 मार्च को सरकार ने डीजल पर 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाया था। अब उसमें और बढ़ोतरी की गई है।

एटीएफ पर भी बढ़ा शुल्क

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर भी ड्यूटी बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। पहले यह 29.5 रुपये प्रति लीटर थी। वहीं, पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी अभी भी शून्य बनी हुई है। यानी पेट्रोल के निर्यात पर अभी कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया गया है।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ये शुल्क बढ़ाए गए हैं। सरकार का उद्देश्य निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर का फायदा उठाने से रोकना है। युद्ध शुरू होने के बाद से दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है।

रिफाइनरी मार्जिन पर भी लगी लगाम

हाल ही में सरकार ने रिफाइनरी मार्जिन को 15 डॉलर प्रति बैरल तक सीमित कर दिया है। इस सीमा से ज्यादा की किसी भी कमाई को सरकारी विपणन कंपनियों को बेचे गए ईंधन पर छूट के रूप में माना जाएगा। यानी रिफाइनरियों को ज्यादा मुनाफा कमाने पर रोक लगा दी गई है। इस अतिरिक्त लाभ का इस्तेमाल खुदरा नुकसान की भरपाई के लिए किया जा सकेगा।

दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हुए देश

बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू किए थे, जिसके बाद तेहरान की ओर से भी व्यापक जवाबी कार्रवाई हुई थी। हालांकि, 8 अप्रैल को तीनों देश दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत हो गए। इससे पश्चिम एशिया और वैश्विक ऊर्जा बाजार में पैदा हुआ व्यवधान फिलहाल थम गया है, लेकिन इसके पहले हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने ये कदम उठाए हैं। सरकार के इस फैसले से घरेलू बाजार में डीजल और एटीएफ की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इसका असर निर्यात पर भी पड़ेगा, लेकिन सरकार की प्राथमिकता फिलहाल घरेलू जरूरतों को पूरा करना है।

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