रामनवमी पर बलेंद्र शाह लेंगे नेपाल पीएम पद की शपथ, जानें पूरा कार्यक्रम

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Newschuski Digital Desk: नेपाल की शोरगुल वाली राजनीति में एक ऐसा चेहरा उभरा है जिसने न तो बड़े-बड़े भाषण दिए और न ही जनता के सामने हाथ जोड़कर वोट मांगे। जनरेशन-जेड (Gen-Z) की क्रांति के नायक और काठमांडू के मेयर रहे बलेंद्र शाह (बालेन शाह) अब नेपाल के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। उनकी जीत पारंपरिक राजनीति के मुंह पर एक करारा तमाचा है, जिसने साबित कर दिया कि जनता अब पुराने वादों से ऊब चुकी है।

राम नवमी के शुभ मुहूर्त में होगा राज्याभिषेक

नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह का शपथ ग्रहण समारोह किसी उत्सव से कम नहीं होगा। यह समारोह शुक्रवार, 27 मार्च को राम नवमी के पावन अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।

समय: दोपहर 12:44 बजे (शुभ मुहूर्त)।

स्थान: राष्ट्रपति भवन, शीतल निवास (काठमांडू)।

खास बात यह है कि जिस समय अयोध्या के राम मंदिर में विशेष पूजा हो रही होगी, ठीक उसी समय नेपाल में एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत होगी।

शंखनाद और मंत्रोच्चार से गूंजेगा काठमांडू

बलेंद्र शाह की टीम ने इस समारोह को धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा के साथ मनाने की तैयारी की है। 108 हिंदू बटुकों द्वारा स्वस्ति वाचन और 7 ब्राह्मणों द्वारा शंखनाद किया जाएगा। शांति और समृद्धि की कामना के लिए 107 बौद्ध लामा गुरु ‘मंगल पाठ’ करेंगे। यह आयोजन नेपाल की साझा सांस्कृतिक विरासत की एक भव्य झलक पेश करेगा।

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बिना भाषण और बिना रैलियों के कैसे मिली जीत

नेपाल की औसत आयु 25 वर्ष है और यही युवा आबादी बलेंद्र शाह की सबसे बड़ी ताकत बनी। शाह ने पूरे चुनाव में मात्र 30 मिनट का भाषण दिया और मीडिया को इंटरव्यू देने से बचते रहे। उनकी पार्टी (RSP) ने बिना किसी मजबूत संगठन के डिजिटल नेटवर्क के जरिए सीधे युवाओं के दिल में जगह बनाई। विदेश में रह रहे नेपालियों ने अपने परिवारों पर दबाव बनाया कि वे एक ‘सुधारवादी’ चेहरे को चुनें, जो देश की तस्वीर बदल सके।

कांटों भरा है नया ताज

प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही बलेंद्र शाह के सामने चुनौतियों का पहाड़ होगा। 3 करोड़ की आबादी वाला नेपाल गरीबी, बेरोजगारी और युवाओं के पलायन जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। लोग व्यवस्था से इतने निराश हो चुके थे कि उन्हें पुराने दलों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही थी। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या एक आउटसाइडर नेता नेपाल की अर्थव्यवस्था को पटरी पर ला पाएगा?

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