चीन में अब महिलाओं पर ज्यादा बच्चे पैदा करने का सरकारी दबाव, थ्री-चाइल्ड पॉलिसी लागू
Newschuski Digital Desk: म्यांमार स्थित मेकांग न्यूज की एक हालिया रिपोर्ट ने चीन के बदलते जनसांख्यिकीय रुख और वहां की महिलाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन सरकार बच्चों की पैदाइश को आज भी व्यक्तिगत अधिकार के बजाय एक आर्थिक औजार की तरह देख रही है।
आंकड़ों में छिपी डरावनी हकीकत
चीन की जन्म दर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि साल 2024 में जहां 9.54 मिलियन बच्चों ने जन्म लिया था, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर केवल 7.92 मिलियन रह गई। यानी एक साल में ही जन्म दर में करीब 17 फीसदी की कमी आई। 1949 के बाद से यह चीन की सबसे कम जन्म दर है, जिसने सरकार की नींद उड़ा दी है।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चीन में दशकों तक महिलाओं के शरीर पर सरकार का नियंत्रण रहा। 1979 में लागू हुई वन-चाइल्ड पॉलिसी के नाम पर महिलाओं को जबरन गर्भपात और नसबंदी जैसे मानसिक व शारीरिक शोषण से गुजरना पड़ा। अब जब देश में काम करने वाले युवाओं की कमी होने लगी है, तो सरकार ने अपनी रणनीति बदलकर महिलाओं पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव डालना शुरू कर दिया है।
पॉलिसी बदली, पर सोच वही
चीन ने 2016 में वन-चाइल्ड नीति खत्म कर टू-चाइल्ड नीति अपनाई। जब गिरावट नहीं थमी, तो अब इसे ‘थ्री-चाइल्ड’ पॉलिसी तक बढ़ा दिया गया है। रिपोर्ट कहती है कि चीन की ये नीतियां लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि जबरन थोपी हुई हैं। पहले कम बच्चे पैदा करने के लिए मजबूर किया गया, और अब आर्थिक मजबूरी के चलते ज्यादा बच्चों की मांग की जा रही है।
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शादी और बच्चों से कतरा रहे हैं चीनी जोड़े
सरकार की अपीलों के बावजूद चीन के युवा इस ओर कदम बढ़ाने से डर रहे हैं। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं।
महंगाई का बोझ: बच्चों की परवरिश और पढ़ाई का बढ़ता खर्च।
कॅरियर और ऑफिस पॉलिटिक्स: वर्कप्लेस पर महिलाओं के साथ होने वाला भेदभाव।
लिंगानुपात का बिगड़ना: सालों तक बेटे की चाहत के कारण अब शादी योग्य महिलाओं की संख्या में भी भारी कमी आ गई है।
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