कैसे चुनी जाती हैं कर्तव्य पथ की भव्य झांकियां, जानें डिजाइन से लेकर फाइनल सिलेक्शन तक का सफर
Republic Day 2026: गणतंत्र दिवस की परेड में निकलने वाली झांकियां केवल सजावट नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सैन्य ताकत का आईना होती हैं। इस साल परेड की थीम स्वतंत्रता का मंत्र-वंदे मातरम और समृद्धि का मंत्र-आत्मनिर्भर भारत रखी गई है। इन्हीं विषयों के इर्द-गिर्द पूरे देश की कलाकृतियां नजर आएंगी।
कौन करता है चुनाव
झांकियों के चयन की जिम्मेदारी रक्षा मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय की होती है। यह प्रक्रिया कोई एक-दो दिन का काम नहीं है, बल्कि परेड से कई महीने पहले ही शुरू हो जाती है। इसके लिए विशेषज्ञों की एक खास समिति (एक्सपर्ट कमेटी) बनाई जाती है, जिसमें आर्ट, कल्चर, पेंटिंग, मूर्तिकला और म्यूजिक जगत की बड़ी हस्तियां शामिल होती हैं।

सिलेक्शन के कड़े पड़ाव
किसी भी राज्य या विभाग की झांकी को इन चरणों से गुजरना पड़ता है।
प्रस्ताव और डिजाइन: सबसे पहले सभी राज्यों और विभागों से उनकी झांकी का स्केच या डिजाइन मांगा जाता है। यह डिजाइन उस साल की ‘थीम’ पर आधारित होना जरूरी है।
नियमों की सख्ती: झांकियों के लिए बहुत कड़े नियम होते हैं। जैसे—प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। झांकी पर किसी भी तरह का विज्ञापन या लोगो नहीं होना चाहिए, सिर्फ राज्य या विभाग का नाम ही लिखा जा सकता है।
बदलाव के सुझाव: एक्सपर्ट कमेटी डिजाइनों को देखती है और जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव या सुधार के सुझाव देती है।
3D मॉडल टेस्ट: डिजाइन पास होने के बाद प्रतिभागियों को अपनी झांकी का एक 3D वर्किंग मॉडल पेश करना होता है। समिति इस मॉडल को हर एंगल से बारीकी से परखती है।
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डिसक्वालीफिकेशन का डर
झांकी चयन की प्रक्रिया इतनी सख्त होती है कि अगर कोई राज्य किसी भी स्टेज पर समिति के सुझावों को पूरा नहीं कर पाता या प्रेजेंटेशन में चूक जाता है, तो उसे तुरंत बाहर (Disqualify) कर दिया जाता है। यही वजह है कि अंत में जो झांकियां कर्तव्य पथ पर दिखती हैं, वे देश की श्रेष्ठतम कला का प्रदर्शन करती हैं।
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